Jharkhand High Court: ट्रेन हादसे में टिकट नहीं मिलने पर भी मिलेगा मुआवजा, रेलवे को 8 लाख देने का आदेश

Jharkhand High Court ने फैसला सुनाया कि ट्रेन हादसे में टिकट नहीं मिलने पर भी मुआवजा मिल सकता है। रेलवे को 8 लाख रुपये देने का आदेश।

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Jharkhand High Court ने कहा कि ट्रेन हादसे में मृत यात्री का टिकट नहीं मिलने पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। रेलवे को 8 लाख रुपये मुआवजा और 6 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया।


Jharkhand High Court रांची: Jharkhand हाइकोर्ट ने ट्रेन दुर्घटना में यात्री की मौत के बाद शव या उसके पास से रेलवे टिकट नहीं मिलने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट नहीं मिलने के आधार पर मृतक के परिजनों के मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। कल्याणकारी कानूनों की भावना को ध्यान में रखते हुए अदालत ने रेलवे को मृतक के आश्रितों को आठ लाख रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही रेलवे दावा अधिकरण के उस आदेश को निरस्त कर दिया गया, जिसमें मुआवजे की अर्जी खारिज कर दी गई थी।

Jharkhand High Court: रेलवे दावा अधिकरण का आदेश निरस्त, परिजनों को राहत

यह मामला पश्चिमी सिंहभूम निवासी बानमाली गोप की ट्रेन दुर्घटना में हुई मौत से संबंधित है। उनके परिजनों ने रेलवे दावा अधिकरण के 12 सितंबर 2023 के आदेश को चुनौती देते हुए  High Court में अपील दाखिल की थी। अधिकरण ने मुआवजे की अर्जी खारिज कर दी थी।

मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई। अदालत ने मामले पर विचार करने के बाद कहा कि मृतक के पास रेलवे टिकट नहीं मिलने को ही मुआवजे का दावा खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने रेलवे को मृतक के आश्रितों को आठ लाख रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत ब्याज की दर से देने का निर्देश दिया।

2017 में ट्रेन से गिरने के कारण हुई थी मौत

मामले के अनुसार, एक सितंबर 2017 को बानमाली गोप झींकपानी स्टेशन से टाटा-बड़बिल पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए थे। उन्हें केंदपोसी स्टेशन जाना था। ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण वह दरवाजे के पास खड़े थे।

केंदपोसी स्टेशन के निकट उनका संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रेन से नीचे गिर पड़े। इस दौरान वह ट्रेन की चपेट में आ गए, जिससे उनके दोनों पैर कट गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

टिकट नहीं मिलने पर मुआवजा खारिज नहीं किया जा सकता

दुर्घटना के बाद मुआवजे के लिए मृतक के परिजनों ने रेलवे दावा अधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, अधिकरण ने 12 सितंबर 2023 को उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद परिजनों ने हाइकोर्ट में अपील की।

हाइकोर्ट ने मामले में कल्याणकारी विधानों की भावना को महत्वपूर्ण मानते हुए परिजनों को राहत दी। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होता है कि ट्रेन दुर्घटना में मौत के मामले में केवल रेलवे टिकट नहीं मिलने के आधार पर मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, ऐसे मामलों में दुर्घटना और दावे से जुड़े अन्य तथ्यों तथा साक्ष्यों पर भी विचार किया जाता है।

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Jharkhand High Court ने ट्रेन हादसे में मुआवजे को लेकर क्या फैसला सुनाया?

अदालत ने कहा कि केवल रेलवे टिकट नहीं मिलने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। रेलवे को मृतक के आश्रितों को 8 लाख रुपये 6 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया।

यह मामला किस घटना से संबंधित है?

1 सितंबर 2017 को पश्चिमी सिंहभूम के बानमाली गोप झींकपानी स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए थे। ट्रेन की अत्यधिक भीड़ के कारण वह दरवाजे के पास खड़े थे और केंदपोसी स्टेशन के निकट ट्रेन से नीचे गिर पड़े, जिससे उनकी मौत हो गई।

रेलवे दावा अधिकरण ने पहले क्या आदेश दिया था?

रेलवे दावा अधिकरण ने 12 सितंबर 2023 को मुआवजे की अर्जी खारिज कर दी थी। Jharkhand High Court ने उस आदेश को निरस्त कर दिया।

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