Bihar Teachers Disaster Management Training, पटना: बिहार में सरकारी स्कूलों को आपदा और विभिन्न जोखिमों से सुरक्षित बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ी पहल की है। राज्य के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के 1,25,211 शिक्षकों को अगले दो महीनों के भीतर आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए शुक्रवार से राजधानी पटना में राज्यस्तरीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ शिक्षकों और विद्यार्थियों को आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना है। इस कार्यक्रम का आयोजन बिहार शिक्षा परियोजना परिषद और यूनिसेफ की ओर से संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसके तहत चयनित मास्टर प्रशिक्षकों को दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 नवंबर तक चलेगा।
280 मास्टर ट्रेनर्स को पांच बैच में मिलेगा प्रशिक्षण
राज्यस्तरीय कार्यक्रम के तहत कुल 280 मास्टर ट्रेनर्स को पांच बैच में प्रशिक्षित किया जाएगा। इन प्रशिक्षकों को आपदा प्रबंधन और विद्यालय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में जाकर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। शिक्षा विभाग की योजना है कि अगले दो महीनों के भीतर राज्य के 1,25,211 शिक्षकों का उन्मुखीकरण पूरा कर लिया जाए। इससे स्कूलों में आपदा प्रबंधन की तैयारी को व्यवस्थित तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की हुई शुरुआत
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवदीप शुक्ला के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी मेहताब रहमानी, अपर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. उदय कुमार उज्ज्वल, बसंत कुमार सिन्हा, राजीव कुमार और यूनिसेफ के पल्लव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम में अधिकारियों ने विद्यालयों को सुरक्षित बनाने के लिए शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनमें समय रहते सही निर्णय लेकर विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
स्कूलों में खतरों की पहचान और सुरक्षित निकासी का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के पहले दिन मास्टर प्रशिक्षकों को विद्यालय परिसर में संभावित खतरों की पहचान करने की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि स्कूल परिसर में मौजूद जोखिमों का आकलन किस तरह किया जाए और किसी आपात स्थिति में विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना कैसे बनाई जाए। इसके साथ ही सुरक्षित निकासी योजना तैयार करने और मॉक ड्रिल आयोजित कराने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इसका उद्देश्य यह है कि शिक्षक केवल आपदा प्रबंधन से जुड़ी सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल भी कर सकें।
विद्यार्थियों में भी विकसित की जाएगी सुरक्षा की आदत
इस पहल में शिक्षकों के प्रशिक्षण के साथ विद्यार्थियों को जागरूक बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर्स को बताया जा रहा है कि बच्चों में आपदा के प्रति जागरूकता कैसे बढ़ाई जाए और उन्हें सुरक्षा से जुड़ी जरूरी आदतें कैसे सिखाई जाएं। विद्यालयों में नियमित सुरक्षा अभ्यास और मॉक ड्रिल के माध्यम से विद्यार्थियों को आपात परिस्थितियों में घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार किया जा सकेगा।
आपदा के प्रति जागरूक शैक्षिक वातावरण बनाने की तैयारी
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों को आपदा और विभिन्न प्रकार के जोखिमों से सुरक्षित बनाना है। इसके माध्यम से स्कूल स्तर पर सुरक्षा संबंधी तैयारियों को मजबूत किया जाएगा। साथ ही शिक्षकों को आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारियों और आवश्यक प्रक्रियाओं से अवगत कराया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उदय कुमार उज्ज्वल ने किया। शिक्षा विभाग और यूनिसेफ की इस संयुक्त पहल से राज्य के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सुरक्षित और आपदा के प्रति जागरूक शैक्षिक वातावरण विकसित करने की उम्मीद है।
Highlights





















