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Patna High Court: विवाहित महिला का caste certificateपति के नाम से होने पर भी मान्य, आरक्षण से नहीं किया जा सकता वंचित

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि विवाहित महिला का जाति प्रमाणपत्र पति के नाम से होने पर भी मान्य है और आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता।

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 पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि विवाहित महिला का caste certificate केवल पति का नाम दर्ज होने के आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता। जाति जन्म से निर्धारित होती है और तकनीकी आधार पर आरक्षण नहीं रोका जा सकता।


Patna High Court पटना: बिहार में आरक्षण का लाभ लेने वाली विवाहित महिला अभ्यर्थियों के लिए Patna High Court का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी विवाहित महिला का जाति प्रमाणपत्र केवल इस आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता कि उसमें पिता की जगह पति का नाम दर्ज है। अदालत ने कहा कि जाति का निर्धारण जन्म के आधार पर होता है और जाति प्रमाणपत्र केवल उसकी पुष्टि करने वाला दस्तावेज है। ऐसे में महज तकनीकी या प्रारूप संबंधी आधार पर किसी महिला अभ्यर्थी को आरक्षण के लाभ से वंचित करना उचित नहीं है।

Patna High Court: पिता की जगह पति का नाम होने से प्रमाणपत्र अमान्य नहीं

पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विवाह के बाद महिला के जाति प्रमाणपत्र में पति का नाम दर्ज होने मात्र से उसकी जन्मजात जाति नहीं बदल जाती।

अदालत के अनुसार, किसी व्यक्ति की जाति जन्म से निर्धारित होती है। जाति प्रमाणपत्र का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की जाति की पुष्टि करना है। इसलिए प्रमाणपत्र में पिता के स्थान पर पति का नाम दर्ज होने को उसकी वैधता समाप्त करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

Caste Certificate :तकनीकी आधार पर आरक्षण से वंचित करना उचित नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी को केवल दस्तावेज में नाम दर्ज करने के तरीके या तकनीकी त्रुटि के आधार पर आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत की इस टिप्पणी से उन विवाहित महिला अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, जिनके जाति प्रमाणपत्र में पिता के बजाय पति का नाम दर्ज है और इसी वजह से उनकी caste certificate पात्रता पर सवाल उठाये जाते हैं।

 

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या विवाहित महिला का जाति प्रमाणपत्र पति के नाम से अमान्य हो सकता है?

नहीं, पटना हाईकोर्ट के अनुसार पति का नाम दर्ज होने के केवल इस आधार पर जाति प्रमाणपत्र अमान्य नहीं किया जा सकता। जाति जन्म से निर्धारित होती है और विवाह से नहीं बदलती।

क्या तकनीकी त्रुटि के आधार पर आरक्षण से वंचित किया जा सकता है?

नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया कि महज तकनीकी या प्रारूप संबंधी आधार पर किसी महिला अभ्यर्थी को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

जाति प्रमाणपत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जाति प्रमाणपत्र का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की जन्मजात जाति की पुष्टि करना है, न कि जाति का निर्धारण करना।

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