मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलकर गयाजी में 45.9 हेक्टेयर वन भूमि पर चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव रखा।
Google पर 22Scope चुनेंGaya Zoo Project Bihar, पटना: बिहार में औद्योगिक विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गयाजी में चिड़ियाघर बनाने की योजना पर पहल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर इस सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की। बैठक में गयाजी में 45.9 हेक्टेयर वन भूमि पर चिड़ियाघर निर्माण, जमुई में सौर ऊर्जा और इस्पात उद्योग, डोभी में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे प्रस्ताव शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने बिहार में उपलब्ध बंजर वन भूमि का नियमानुसार औद्योगिक और विकासात्मक कार्यों में उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाते समय पर्यावरण संरक्षण, प्रतिपूरक वनीकरण और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन किया जाएगा। बैठक में केंद्रीय मंत्री से प्रस्तावों की जांच और जरूरी स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध भी किया गया।
नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री @byadavbjp जी से बिहार के गया जी में चिड़ियाघर एवं औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, पर्यटन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर सार्थक चर्चा हुई। pic.twitter.com/eP1EdKuxnj
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) November 3, 2026
गयाजी में 45.9 हेक्टेयर वन भूमि पर चिड़ियाघर का प्रस्ताव
बैठक में गयाजी में चिड़ियाघर निर्माण का प्रस्ताव प्रमुखता से उठा। इसके लिए 45.9 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन यानी निर्धारित प्रक्रिया के तहत गैर-वन उपयोग की अनुमति लेने पर चर्चा हुई। परियोजना के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इस योजना के आगे बढ़ने के लिए संबंधित वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियां जरूरी होंगी। फिलहाल बैठक में इस परियोजना के प्रस्ताव और मंजूरी की प्रक्रिया पर चर्चा हुई है; चिड़ियाघर के निर्माण की अंतिम स्वीकृति की जानकारी नहीं दी गई है।
जमुई में सौर ऊर्जा और इस्पात उद्योग के लिए 4,340 एकड़ वन भूमि का प्रस्ताव
जमुई जिले में सौर ऊर्जा और इस्पात उद्योग स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके लिए कुल 9,000 एकड़ भूमि की जरूरत बताई गई है, जिसमें से 4,340 एकड़ वन भूमि के अपयोजन की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा गया। परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने और नियमानुसार अनुमति प्राप्त करने पर बैठक में विचार-विमर्श हुआ। सरकार का मानना है कि इन औद्योगिक परियोजनाओं से निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वन भूमि के उपयोग से जुड़े प्रस्तावों पर आगे की प्रक्रिया संबंधित विभागों और सक्षम प्राधिकरणों की स्वीकृति के बाद ही बढ़ सकेगी।
डोभी में 1,600 एकड़ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर
गयाजी जिले के डोभी में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के तहत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके लिए कुल 1,600 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इसमें 1,308.72 एकड़ वन भूमि के अपयोजन का प्रस्ताव बैठक में रखा गया। इस औद्योगिक क्लस्टर के विकसित होने से विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को राज्य के औद्योगिक आधार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया और प्रस्तावों के शीघ्र परीक्षण का अनुरोध किया।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में 5.8 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर
पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष (Valmiki Tiger Reserve) से जुड़ी सड़क परियोजना पर भी बैठक में चर्चा हुई। इसके तहत 5.8 किलोमीटर लंबे मदनपुर-पनियहवा पथ की मरम्मत और उसे प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के साथ वन क्षेत्र से जुड़ी पर्यावरणीय आवश्यकताओं का ध्यान रखना है। इसके लिए भी संबंधित वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
मुंगेर के संग्रामपुर और भीमबांध में विकास की योजना
मुंगेर जिले के तारापुर अनुमंडल के अंतर्गत संग्रामपुर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। इसके लिए कुल 114 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है, जिसमें 84 एकड़ जंगल-झाड़ भूमि के अपयोजन की स्वीकृति मांगी गई है। इसके अलावा मुंगेर के भीमबांध क्षेत्र में ईको टूरिज्म की संभावनाओं को विकसित करने पर विचार-विमर्श हुआ। इसके लिए आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पहल से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना है।
पर्यावरण संरक्षण के मानकों के साथ आगे बढ़ेंगी परियोजनाएं
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक में कहा कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर काम करना जरूरी है। उन्होंने प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) से जुड़े वैधानिक प्रावधानों और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ सकता है, रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं और पर्यटन तथा आधारभूत संरचना को भी गति मिल सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विकास के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। सभी प्रस्तावों को निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाने की बात कही गई। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से सभी प्रस्तावों का शीघ्र परीक्षण कराने और नियमानुसार आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सहयोग मांगा। फिलहाल इन परियोजनाओं के संबंध में चर्चा और स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।
गयाजी में चिड़ियाघर परियोजना के लिए कितनी वन भूमि की आवश्यकता है?
गयाजी में चिड़ियाघर निर्माण के लिए 45.9 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन का प्रस्ताव रखा गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने और कौन-कौन सी परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा?
चिड़ियाघर के अलावा जमुई में सौर ऊर्जा और इस्पात उद्योग, डोभी में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में एलिवेटेड कॉरिडोर और मुंगेर में औद्योगिक क्षेत्र विकास का प्रस्ताव रखा गया।
डोभी में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता है?
डोभी में कुल 1,600 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें से 1,308.72 एकड़ वन भूमि के अपयोजन का प्रस्ताव रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं में किन बातों पर जोर दिया?
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण, प्रतिपूरक वनीकरण और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन करने पर जोर दिया।
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