बिहार जल जीवन हरियाली अभियान के तहत 23.64 करोड़ पौधे लगाए गए और 1.10 लाख जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया गया।
Google पर 22Scope चुनेंBihar Jal Jeevan Hariyali Campaign, पटना: बिहार में जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अब तक 23.64 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। वहीं, राज्य में 1.10 लाख से अधिक सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया गया है। मंगलवार को पटना स्थित सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) के संवाद कक्ष में जल-जीवन-हरियाली दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय परिचर्चा और संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका विषय ‘जन जागरूकता से सतत विकास की ओर सामूहिक पहल’ रखा गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा तथा आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर अपने विचार रखे।
बिहार में 23.64 करोड़ से अधिक पौधरोपण
कार्यक्रम में जल-जीवन-हरियाली अभियान के उप मिशन निदेशक राम कुमार पोद्दार ने अभियान के तहत अब तक किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिहार में अब तक 23.64 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। इसके साथ ही तालाब, पोखर, आहर और पाइन जैसी 1.10 लाख से अधिक सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार पूरा किया गया है।
उन्होंने बताया कि राज्य में 17,544 सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं और 10,964 सार्वजनिक कुओं को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। अभियान के तहत जल स्रोतों को सुरक्षित रखने और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इसमें पुराने जल स्रोतों का संरक्षण, नए जल स्रोतों का निर्माण और वर्षा जल को संचित करने की व्यवस्थाएं शामिल हैं।
तालाबों से लेकर कुओं तक जल संरक्षण पर काम
राम कुमार पोद्दार ने अभियान के तहत किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि चापाकलों और कुओं के किनारे सोख्ता निर्माण, चेकडैम का निर्माण तथा नए जल स्रोतों का सृजन किया जा रहा है। सरकारी भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से जुड़े कार्य भी अभियान का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि जल संचयन संरचनाओं का संरक्षण और संवर्धन भविष्य में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य में प्रत्येक महीने के पहले मंगलवार को जल-जीवन-हरियाली दिवस मनाया जाता है, ताकि जल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता बनी रहे।
जल है तो जीवन है, व्यवहार में बदलाव जरूरी: राजीव कुमार
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अपर सचिव राजीव कुमार ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली का सीधा संदेश है कि जल रहेगा तभी जीवन सुरक्षित रहेगा और हरियाली होगी तभी पर्यावरण संतुलित रहेगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब केवल एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न विभागों के मुख्य कार्यक्षेत्र का हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, कई लोग पानी को अपनी निजी संपत्ति समझकर गाड़ियों और फर्श की धुलाई में जरूरत से अधिक इस्तेमाल करते हैं, जबकि जल पूरे समाज की साझा संपदा है। उन्होंने विभागों के नोडल अधिकारियों से अभियान से जुड़ी प्रभावशाली कहानियां और लाभार्थियों के अनुभव जुटाने को कहा, ताकि इनके माध्यम से आम लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से बढ़ेगा प्रचार-प्रसार
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक प्रेस विनीत सिन्हा ने जलवायु परिवर्तन को पूरी दुनिया के सामने मौजूद गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरण के कारण एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) और नई-नई बीमारियां भी मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही हैं।
उन्होंने बताया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए पारंपरिक माध्यमों के साथ आधुनिक संचार तकनीकों का भी इस्तेमाल करने की योजना है। रेडियो, प्रिंट मीडिया, होर्डिंग और नुक्कड़ नाटक के अलावा आईवीआर सिस्टम, व्यक्तिगत फोन कॉल और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज या विशेष एपिसोड के जरिए भी लोगों तक अभियान का संदेश पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
14 विभागों के अधिकारियों ने साझा किए सुझाव
संगोष्ठी में जल-जीवन-हरियाली अभियान से जुड़े 14 विभागों के नोडल पदाधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में चल रहे कार्यों की जानकारी दी। नगर विकास एवं आवास विभाग, मत्स्य निदेशालय और शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। साथ ही लोगों की भागीदारी बढ़ाने और जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने के सुझाव भी दिए।
कार्यक्रम में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक रवि भूषण सहाय, संयुक्त निदेशक नागेंद्र गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सुनील कुमार पाठक ने स्वागत भाषण दिया, जबकि मंच संचालन उपनिदेशक नूपुर झा ने किया। परिचर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि जल और हरियाली का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए आम लोगों और सभी विभागों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
Bihar Jal Jeevan Hariyali Campaign के तहत अब तक कितने पौधे लगाए जा चुके हैं?
इस अभियान के तहत अब तक 23.64 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। साथ ही तालाब, पोखर, आहर और पाइन जैसी 1.10 लाख से अधिक सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार पूरा किया गया है।
जल-जीवन-हरियाली दिवस कब मनाया जाता है?
राज्य में प्रत्येक महीने के पहले मंगलवार को जल-जीवन-हरियाली दिवस मनाया जाता है ताकि जल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता बनी रहे।
अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए कौन-कौन से माध्यम इस्तेमाल किए जा रहे हैं?
पारंपरिक माध्यमों जैसे रेडियो, प्रिंट मीडिया, होर्डिंग और नुक्कड़ नाटक के साथ आईवीआर सिस्टम, व्यक्तिगत फोन कॉल और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज के जरिए भी संदेश पहुंचाया जा रहा है।
कितने विभागों के अधिकारियों ने संगोष्ठी में भाग लिया?
Bihar Jal Jeevan Hariyali Campaign से जुड़े 14 विभागों के नोडल पदाधिकारियों ने संगोष्ठी में जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी।
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