झारखंड में सियासी गहमागहमी जारी

देर रात सत्ता पक्ष के विधायकों की बैठक

रांची : झारखंड में सियासी गहमागहमी जारी है. लाभ के पद मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी पर

मंडरा रहे संकट को देखते हुए सरकार को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है.

देर रात सीएम आवास में सत्ता पक्ष के विधायकों की बैठक चली

जिसमें उन्हे रांची न छोड़ने के निर्देश दिए गए.

बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाथ पांडेय भी शामिल हुए.

आज भी बैठकों का दौर जारी रहने की संभावना है.

नौका विहार करने के बाद वापस सीएम आवास लौटे विधायक

शनिवार को इससे पहले सत्ता पक्ष के सभी विधायक सीएम आवास में जमा हुए थे

जहां से बसों में बैठाकर उन्हे लतरातू डैम और डूमरगढ़ी गेस्ट हाउस ले जाया गया.

डैम में नौका विहार करने और घूमने-फिरने के बाद विधायक वापस सीएम आवास लौट आए

जिसके बाद बैठक शुरू हुई. इस बीच दिनभर अटकलों का बाज़ार गर्म रहा.

खासकर जब कैमरे में विधायकों की गाड़ियों में लगेज की तस्वीरें कैद हुई तो

चर्चा तेज हो गई कि विधायकों को कहीं शिफ्ट करने की तैयारी है. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ.

सीता सोरेन और बसंत सोरेन पूरे दिन साथ रहे

झामुमो के लिए अच्दी बात यह रही कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाभी सीता सोरेन

और भाई बसंत सोरेन पूरे दिन टीम के साथ मौजूद रहे. इन दोनों के बारे में कयास लगाया जा रहा था कि वे नाराज चल रहे हैं. लोबिन हेम्ब्रम भी साथ रहे. उन्होंने हाल के दिनों में नीतिगत मसलों पर हेमंत सोरेन की जमकर खिंचाई की थी.

झारखंड में सियासी गहमागहमी : रात तक विधायकों को नहीं मिली फुर्सत

देर शाम विधायकों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने आवास लौटे, लेकिन यहां भी विधायकों को छोड़ा नहीं गया. पहले से ही प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय के आने की सूचना मिल चुकी थी और फिर कांग्रेस विधायक दल की बैठक रात साढ़े आठ बजे आहुत हो चुकी थी. इस बैठक में कांग्रेस के 18 में से 15 विधायक उपस्थित रहे.

झारखंड में सियासी गहमागहमी : सदस्यता रद्द होने में लग सकता है समय

सीएम हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता रद्द होने के मामले में राजभवन अभी मौन है. बताया जाता है कि इसमें दो-तीन दिनों का और समय लग सकता हे. आयोग की अनुशंसा के बाद भी सदस्यता रद्द करने में क्यों देरी हो रही है. इस पर राजभवन द्वारा अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई है. शनिवार को इस मामले में राजभवन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर कयास लगाया जा रहा है कि राजभवन कोई जल्दीबाजी नहीं करना चाहता है. इधर एक- दो दिन लगातार अवकाश होने के कारण यह संभावना जताई जा रही है कि इसमें कुछ और समय लग सकता है. सभी की निगाहें राजभवन और आयोग के अधिकृत फैसले पर टिकी है.

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