मोतिहारी : मोतिहारी से एक सनसनीखेज और लंबे समय से चल रहे आपराधिक मामले में अहम मोड़ आया है। जमीन विवाद को लेकर हुए तेजाब हमले के मामले में करीब 12 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपियों को दोषी करार दे दिया है। अब इस मामले में सजा का ऐलान छह जुलाई को किया जाएगा। यह मामला घोड़ासहन थाना क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2008 में पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। पीड़ित अभय कुमार कश्यप ने बताया कि उनके पिता ने वर्ष 2008 में पुश्तैनी जमीन का बंटवारा तीनों भाइयों के बीच कर दिया था, जिसमें प्रत्येक को लगभग एक-एक बीघा जमीन मिली।
कोई संतान नहीं होने का फायदा उठाते हुए उनके बड़े भाई विजय ने उन पर अपने हिस्से की जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया – अभय कुमार
अभय कुमार के अनुसार, उनके कोई संतान नहीं होने का फायदा उठाते हुए उनके बड़े भाई विजय राय ने उन पर अपने हिस्से की जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। अभय कुमार ने आरोप लगाया कि बड़े भाई विजय राय ने अपने ससुराल पक्ष के लोगों और पत्नी के साथ मिलकर साजिश रची। जब उन्होंने जमीन देने से इनकार कर दिया, तो योजना के तहत उनकी पत्नी पर तेजाब से हमला कर दिया गया। घटना के दौरान जब उनकी पत्नी ने शोर मचाया, तो बीच वाले भाई की पत्नी और उनके बच्चे उसे बचाने के लिए पहुंचे।

हमलावरों ने उन पर भी तेजाब फेंक दिया, जिससे वे भी गंभीर रूप से झुलस गए
आरोप है कि हमलावरों ने उन पर भी तेजाब फेंक दिया, जिससे वे भी गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद सभी घायलों को गंभीर अवस्था में मोतिहारी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चला। इस मामले को लेकर घोड़ासहन थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और तभी से यह मामला न्यायालय में लंबित था। मामले में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता पप्पू सिंह ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से दोनों पक्षों की ओर से लगातार बहस और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आरोपियों को दोषी पाया है।

अदालत ने फिलहाल सजा को सुरक्षित रख लिया है, 6 जुलाई को अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा
उन्होंने कहा कि अदालत ने फिलहाल सजा को सुरक्षित रख लिया है और छह जुलाई को अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा। इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। वहीं, स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा है, क्योंकि यह घटना पारिवारिक विवाद के भयावह रूप को दर्शाती है। अब सभी की नजरें छह जुलाई को आने वाले न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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सोहराब आलम की रिपोर्ट
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