झारखंड में CNT एक्ट में बड़ा बदलाव संभव, आदिवासी अब थाना क्षेत्र से बाहर भी खरीद सकेंगे जमीन

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झारखंड में CNT एक्ट में बड़ा बदलाव संभव, आदिवासी अब थाना क्षेत्र से बाहर भी खरीद सकेंगे जमीन
झारखंड में CNT एक्ट में बड़ा बदलाव संभव, आदिवासी अब थाना क्षेत्र से बाहर भी खरीद सकेंगे जमीन
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रांची: झारखंड में आदिवासी जमीन से जुड़े क़ानून में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी है। ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (TAC) की 16 मई को होने वाली बैठक में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम CNT एक्ट में संशोधन पर मुहर लग सकती है। प्रस्ताव के मुताबिक, अब आदिवासी अपने थाना क्षेत्र से बाहर भी घर बनाने के लिए 20 डिसमिल तक जमीन खरीद सकेंगे। यह सिफारिश TAC राज्य सरकार को भेज सकती है।

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वर्तमान में CNT एक्ट के तहत आदिवासी जमीन केवल उसी थाना क्षेत्र का आदिवासी खरीद सकता है, जिससे आदिवासियों को शहरों या दूसरे इलाकों में घर बनाना मुश्किल होता है। अगर थाना क्षेत्र की बाध्यता खत्म होती है, तो हजारों ऐसी जमीनें भी वैध हो जाएंगी जो अब तक नियमों का उल्लंघन कर खरीदी गई हैं। कल्याण विभाग ने इस संभावित संशोधन को लेकर एजेंडा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजा है, जो TAC के अध्यक्ष भी हैं।

TAC बैठक में फिर उठेगा मुद्दा
TAC की पिछली बैठक 16 नवंबर 2023 को हुई थी, जिसमें इस संशोधन पर सुझाव जरूर आया था, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका था। अब एक बार फिर यह मुद्दा प्रमुखता से उठने वाला है और अधिकांश सदस्य इस बाध्यता को खत्म करने के पक्ष में हैं। झामुमो विधायक लुईस मरांडी ने भी बयान दिया है कि यह समय की मांग है और इससे आदिवासी समाज को व्यापक लाभ होगा।

संभावित फायदे:

  • ग्रामीण आदिवासी अब शहरी इलाकों में भी घर के लिए जमीन खरीद सकेंगे।

  • आदिवासी जमीन की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे आर्थिक लाभ मिलेगा।

  • जरूरत पड़ने पर जमीन बेचकर व्यवसायिक निवेश किया जा सकेगा।

संभावित नुकसान:

  • प्रभावशाली लोग घर के नाम पर शहरों में जमीन खरीद सकते हैं।

  • सीधे-सादे आदिवासियों को बहलाने का खतरा बढ़ेगा।

  • खेती की जमीन को भी घर के नाम पर खरीदा जा सकता है।

पेसा कानून और लुगुबुरू प्रोजेक्ट पर भी चर्चा संभव
बैठक में पेसा कानून के क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा संभावित है। राज्य सरकार पर इसे लागू करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा लुगुबुरू में डीवीसी के हाईडल प्रोजेक्ट का मुद्दा भी एजेंडे में शामिल हो सकता है, जिसका आदिवासी समाज पुरजोर विरोध कर रहा है क्योंकि यह स्थान धार्मिक महत्व का है।

TAC की संरचना:
TAC के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उपाध्यक्ष कल्याण मंत्री चमरा लिंडा हैं। विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सदस्य हैं। अन्य सदस्यों में लुईस मरांडी, संजीव सरदार, सोनाराम सिंकू, जगत मांझी, दशरथ गगराई, सुदीप गुड़िया, राम सूर्या मुंडा, आलोक सोरेन, राजेश कच्छप, जिगा सुसारन होरो, नमन विक्सल कोनगाड़ी और रामचंद्र सिंह शामिल हैं। साथ ही जोसाई मार्डी और नारायण उरांव नामित सदस्य हैं।

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