Jharkhand: झारखंड में बीते दिनों एयर एंबुलेंस क्रैश की दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस दुर्घटना में 7 लोगों की जान चली गई। अब झारखंड में इस मामले को लेकर राजनीति शुरु हो गई है । पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरु हो चुका है। नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने इस मामले पर हेमंत सरकार को घेरा है।
बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार पर हमला बोला है, बाबूलाल मरांडी ने सरकार की एयरएंबुलेंस पर भी सवाल उठाए है।
नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने लिखा- एयर एम्बुलेंस सेवा को हेमंत सरकार की बहुप्रचारित योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन हालिया दुखद हवाई हादसे ने इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया गया कि एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने वाली कम्पनी द्वारा मरीज को 30% से अधिक बर्न इंजरी का हवाला देकर सरकारी सब्सिडी देने से इनकार कर दिया गया।
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Hemant Soren जी, कुछ तो शर्म कीजिए…
बाद में उसी मरीज को 5 लाख के बजाय 8 लाख रुपये किराया तय होने पर दिल्ली ले जाने के लिए तैयार हो गए। न जाने कितने ऐसे बहाने बनाकर रोज गरीबों को लूटा जा रहा है। Hemant Soren जी, कुछ तो शर्म कीजिए। ढीठ की तरह कमीशन आप खा रहे हैं, लेकिन आपके कमीशन के लिए गरीबों को कर्ज लेना पड़ जाता है। हेमंत जी, जवाब दीजिए कि सरकार ने 30% बर्न इंजरी तक ही सब्सिडी देने का निर्णय क्यों लिया है? क्या इस निर्णय में किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की स्पष्ट राय शामिल थी?
Babulal Marandi ने उठाया सवाल, पूछा- हवाई यात्रा असुरक्षित है, तो फिर अधिक राशि लेकर उसी मरीज को ले जाने की सहमति कैसे दी गई?
और यदि 30% से अधिक बर्न इंजरी की स्थिति में हवाई यात्रा असुरक्षित है, तो फिर अधिक राशि लेकर उसी मरीज को ले जाने की सहमति कैसे दी गई? हमें यह भी बताया गया है कि 28 अप्रैल 2023 से चल रही आपकी हवा हवाई एयर एंबुलेंस सेवा का लाभ अबतक बमुश्किल एक दर्जन लोगों को ही मिला है, उसमें तो चार मंत्री ही शामिल हैं। और आपने इस बार भी बजट में इसके लिये 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।
ये जो आपकी चार्टेड एयर सेवा है न, ये भी अपने आप में एक बड़ा घोटाला है। अगर आप में थोड़ी भी मानवीय संवेदना है, तो एयर एंबुलेंस देने वाली इस कंपनी पर तुरंत एफ़आइआर कराईये और जॉंच कराईये कि जब इसने 65 परसेंट बर्न केस बोलकर सब्सिडी पर जहाज़ देने से मना किया, तो फिर आठ लाख रूपये लेकर कैसे दे दिया?
Babulal Marandi ने निपष्क्ष जांच की रखी मांग
यदि ऐसी शर्तों और बहानों के आधार पर जरूरतमंदों को सेवा से वंचित किया जा रहा है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। सरकार संबंधित कंपनी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराए, आवश्यक हो तो उसे ब्लैकलिस्ट करे, और अब तक इस सेवा का लाभ लेने वाले लोगों से वसूले गए किराए की भी पारदर्शी समीक्षा कराए।
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