सहायक आचार्य नियुक्ति के संशोधित रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई। जेएसएससी को सीट सुरक्षित रखने का निर्देश।
Assistant Teacher Result Caseरांची: झारखंड हाईकोर्ट में सहायक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा के संशोधित रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को याचिकाकर्ताओं के लिए सीट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए सात जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन की ओर से विस्तृत बहस के लिए समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
Assistant Teacher Result Case:याचिकाकर्ताओं ने संशोधित मेरिट लिस्ट पर उठाये सवाल
प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अदालत को बताया कि जेटेट परीक्षा केवल पात्रता परीक्षा है और इसका नियुक्ति प्रक्रिया में आरक्षण लाभ से कोई सीधा संबंध नहीं है।
उन्होंने दलील दी कि सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली और विज्ञापन में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया था कि जेटेट में आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में दोबारा आरक्षण नहीं मिलेगा।
Key Highlights
सहायक आचार्य संशोधित रिजल्ट मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई
जेएसएससी को सीट सुरक्षित रखने का निर्देश
सात जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई
जेटेट आरक्षण लाभ को लेकर उठा विवाद
संशोधित मेरिट लिस्ट से कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रभावित
Assistant Teacher Result Case: पूर्व चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटकी
याचिका आशा कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर की गयी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले जारी मेरिट लिस्ट में उनका चयन हो चुका था। जेएसएससी द्वारा उनके नाम की अनुशंसा सरकार को भेजी गयी थी और जिला स्तर पर काउंसलिंग भी पूरी हो चुकी थी।
इसी बीच राज्य सरकार ने मेरिट लिस्ट में संशोधन करने का फैसला लिया। संशोधित मेरिट लिस्ट में यह तय किया गया कि जेटेट में आरक्षण का लाभ लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य नियुक्ति में दोबारा आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
Assistant Teacher Result Case: संशोधन से बदली चयन सूची
सरकार के इस फैसले के बाद कई ऐसे अभ्यर्थी, जो पहले सामान्य कोटि में चयनित हुए थे, उन्हें वापस आरक्षित श्रेणी में शामिल कर दिया गया। इससे पहले चयनित कई उम्मीदवार नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो गये।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमों में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के बावजूद मेरिट लिस्ट में बदलाव किया गया, जिससे कई अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
अब मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया और संशोधित रिजल्ट पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।
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