झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा की पुनर्परीक्षा मामले में JSSC पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने हैकिंग और जांच को लेकर कड़े सवाल उठाए।
Jharkhand High Court Update रांची:रांची में Jharkhand High Court ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़े मामले में Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। शुक्रवार को जस्टिस Deepak Roshan की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग से पूछा कि यदि कंप्यूटर हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका थी, तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की है।
Key Highlights:
• झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC के रवैये पर जताई कड़ी नाराजगी
• 2819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई
• कोर्ट ने पूछा, हैकिंग आशंका थी तो FIR क्यों नहीं हुई
• बिना दोषी अभ्यर्थियों की पहचान सभी को पुनर्परीक्षा में शामिल करने पर सवाल
• मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी
Jharkhand High Court Update:2819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा पर उठे सवाल
यह मामला माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के पेपर-2 की पुनर्परीक्षा से जुड़ा है। प्रार्थी अर्चना कुमारी एवं अन्य ने याचिका दाखिल कर JSSC के 23 अप्रैल को जारी नोटिस को चुनौती दी है।
इस नोटिस में प्रार्थी सहित कुल 2819 अभ्यर्थियों को 8 मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बिना स्पष्ट कारण सभी को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना अनुचित है।
Jharkhand High Court Update:कोर्ट ने पूछा, दोषी कौन और जांच कहां
प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि आयोग ने न तो परीक्षा केंद्रों पर अधिकृत और अनधिकृत व्यक्तियों की पहचान की और न ही दोषी अभ्यर्थियों को चिह्नित किया।
इसके बावजूद सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो पूरी तरह अवैध है। याचिकाकर्ताओं ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
इस पर अदालत ने JSSC से पूछा कि आखिर इस मामले में दोबारा परीक्षा क्यों ली जा रही है और यदि गड़बड़ी हुई थी तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
Jharkhand High Court Update:हैकिंग और बाहरी हस्तक्षेप पर गंभीर टिप्पणी
कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि यदि आयोग को कंप्यूटर हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका थी, तो इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच क्यों नहीं कराई गई।
अदालत की इस सख्त टिप्पणी के बाद अब JSSC पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है। अगली सुनवाई में आयोग को विस्तृत स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
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