राम मंदिर से बदली अयोध्या की तस्वीर: धर्म और आस्था के साथ समृद्धि का नया अध्याय

रांची : राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और भव्य निर्माण के बाद अयोध्या न सिर्फ एक आध्यात्मिक धाम के रूप में उभरी है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक बदलाव की मिसाल भी बन चुकी है। इसी संदर्भ में हनुमान निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण से हमारी संवाददाता करिश्मा सिन्हा ने विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे राम मंदिर ने अयोध्या और उसके आस-पास के इलाकों की पूरी कायापलट कर दी है।

अयोध्या अब रोजगार का केंद्र

आचार्य जी ने बताया कि एक समय था जब अयोध्या के स्थानीय लोग रोज़गार की तलाश में बाहर जाते थे। उन्हें लगता था कि अयोध्या में कोई विशेष अवसर नहीं है, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। “अब लाखों लोग अयोध्या में आकर बस रहे हैं, यहां हर किसी को रोज़गार के नए अवसर मिल रहे हैं – चाहे वह ठेले-पटरी पर काम करने वाला हो या फाइव स्टार होटल खोलने वाला,” उन्होंने कहा।

चारों ओर श्रद्धालु, हर दिन त्योहार जैसा माहौल

आचार्य जी ने बताया कि पहले अयोध्या में भीड़ सिर्फ खास अवसरों पर जैसे राम नवमी या सावन में देखने को मिलती थी। लेकिन आज, अयोध्या हर दिन श्रद्धालुओं से भरी रहती है। “कोई भी फ्लाइट खाली नहीं जाती, और 450 किलोमीटर के दायरे में पांच एयरपोर्ट्स बन चुके हैं,” उन्होंने जानकारी दी। रेलवे स्टेशन की हालत भी अब किसी बड़े महानगर के स्टेशन जैसी हो गई है।

राजस्व में जबरदस्त बढ़ोतरी

राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में पर्यटन, होटल, खानपान और परिवहन जैसे सेक्टरों में बेहिसाब वृद्धि हुई है। रेडिसन ब्लू, ताज और उडुपी जैसे नामी रेस्टोरेंट्स अब अयोध्या की सड़कों पर दिखने लगे हैं। आचार्य जी ने बताया, “धर्म के दरवाजे पर अब बाजार भी झोली फैलाए खड़ा है। छोटे विक्रेताओं से लेकर बड़े व्यापारियों तक, सबको यहां अवसर मिल रहा है।”

लेकिन यह केवल आर्थिक लाभ की बात नहीं

जहां एक ओर राजस्व में इज़ाफा हुआ है, वहीं आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने यह भी स्पष्ट किया कि अयोध्या का मूल्य केवल पैसों से आंकना उचित नहीं है। “अयोध्या की समृद्धि उसका बायप्रोडक्ट है, असली बात यह है कि राम मंदिर ने भारत की सोई हुई अस्मिता को जगा दिया है,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार, यह भारत की धार्मिकता, आस्था और संस्कृति का पुनर्जागरण है।

धर्म अब ‘लायबिलिटी’ नहीं, ‘एसेट’ बन चुका है

आज की पीढ़ी जिसे कभी धर्म केवल एक जिम्मेदारी लगती थी, अब उसे यह समझ में आने लगा है कि धर्म समाज को पोषण दे सकता है, रोजगार दे सकता है, और बाजार को समृद्ध बना सकता है। आचार्य जी ने कहा, “धर्म अब सिर्फ चंदा मांगने वाला नहीं रहा, बल्कि देने वाला बन गया है। अयोध्या इसका सबसे सशक्त उदाहरण है।”

राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं रहा, यह भारत के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास का प्रतीक बन चुका है। अयोध्या अब एक ऐसा केंद्र बन गई है जहां आस्था, अध्यात्म और आधुनिकता एक साथ पनप रहे हैं।

करिश्मा सिन्हा की रिपोर्ट

 

 

 

 

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