झारखंड में “डायन-बिसाही” पर राज्यसभा में उठी आवाज, Deepak Prakash ने कड़े कदमों की मांग की

राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने संसद में विशेष उल्लेख के माध्यम से झारखंड में प्रचलित डायन-बिसाही जैसी अमानवीय कुप्रथा का मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों पर हमला बताते हुए कानून को सख्त बनाने, जन-जागरूकता अभियान चलाने और समाज के सामूहिक प्रयास से इस कुप्रथा को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।

Jharkhand: झारखंड के पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद Deepak Prakash ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा में विशेष उल्लेख (Special Mention) के माध्यम से झारखंड में व्याप्त “डायन-बिसाही” जैसी अमानवीय कुप्रथा का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह कुप्रथा न केवल महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों पर सीधा प्रहार है, बल्कि पूरे समाज के माथे पर कलंक भी है।

इसे सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक बताया

सांसद Deepak Prakash ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि आधुनिक युग में भी झारखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास के कारण महिलाओं—विशेषकर वृद्ध, विधवा और असहाय महिलाओं—को “डायन” घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद उनके साथ सामाजिक बहिष्कार, मारपीट, अमानवीय व्यवहार और कई बार जघन्य हत्या जैसी घटनाएं तक सामने आती हैं। उन्होंने इसे सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक बताया।

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इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल देते हुए तीन प्रमुख उपाय सुझाए

उन्होंने इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल देते हुए तीन प्रमुख उपाय सुझाए। पहला, वर्तमान कानूनों को और अधिक प्रभावी बनाते हुए दोषियों को त्वरित और कठोर सजा सुनिश्चित की जाए। दूसरा, राज्य के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरण अभियान चलाकर अंधविश्वास के विरुद्ध सामाजिक चेतना को मजबूत किया जाए। तीसरा, सरकार, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों को मिलकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए सामूहिक पहल करनी होगी।

सांसद Deepak Prakash ने कहा कि “डायन-बिसाही” जैसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं हैं, बल्कि यह हमारे सामाजिक ताने-बाने और आपसी सौहार्द पर भी गंभीर आघात हैं। उन्होंने समाज से भी आह्वान किया कि अंधविश्वास के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाई जाए, तभी इस अमानवीय कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सकेगा।

 

 

❓ Frequently Asked Questions

Q1. सांसद दीपक प्रकाश ने राज्यसभा में कौन सा मुद्दा उठाया?

सांसद दीपक प्रकाश ने झारखंड में प्रचलित “डायन-बिसाही” जैसी अमानवीय कुप्रथा का मुद्दा राज्यसभा में विशेष उल्लेख के माध्यम से उठाया।

Q2. डायन-बिसाही प्रथा को लेकर सांसद ने क्या चिंता जताई?

उन्होंने कहा कि यह कुप्रथा महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों पर सीधा प्रहार है और सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है।

Q3. इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए क्या उपाय सुझाए गए?

उन्होंने तीन उपाय सुझाए—कानून को और सख्त बनाना, ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान चलाना और सरकार व समाज द्वारा मिलकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

Q4. डायन-बिसाही की घटनाएं समाज पर कैसे प्रभाव डालती हैं?

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं हैं, बल्कि समाज के आपसी सौहार्द और सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

Q5. समाज से सांसद ने क्या अपील की?

सांसद ने लोगों से अंधविश्वास के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाने की अपील की ताकि इस अमानवीय कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

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