Ranchi- झारखंड हाई कोर्ट ने खूंटी के कोचांग में सामूहिक दुष्कर्म के दो सजायाफ्ता को जमानत देने से इन्कार कर दिया है.
जस्टिस आर मुखोपाध्याय व जस्टिस अंबुज नाथ की खंडपीठ ने कहा कि इनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और पीड़ितों
ने इन्हें चिह्नित किया है. ऐसे में इन्हें राहत नहीं दी जा सकती है. इसके बाद अदालत ने इनकी जमानत याचिका
को खारिज कर दिया. इस संबंध में जांस जोनास तिड़ू व बलराम समद की ओर से हाई कोर्ट
में निचली अदालत से मिला सजा के खिलाफ अपील दाखिल की थी.
इस दौरान उनकी ओर से जमानत देने की भी गुहार लगाई गई थी. सुनवाई के दौरान इनकी ओर से अदालत
को बताया गया कि इस मामले में सह अभियुक्त पादरी अल्फांसो आइंद को पूर्व में हाई कोर्ट की ओर से जमानत दी गई है.
इन पर कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है. इसलिए इन्हें भी जमानत की सुविधा मिलनी चाहिए. राज्य सरकार की ओर से
भोलानाथ ओझा ने जमानत विरोध करते हुए कहा कि दुष्कर्म की पीड़ितों ने इन दोनों की पहचान की थी.
वहीं, इस मामले में सह अभियुक्त ने भी अपने बयान में कहा था कि ये पत्थलगड़ी के नेता थे और इनके
कहने पर ही स्कूल में नुक्कड़ नाटक करने वाली पांच महिलाओं का अपहरण कर दुष्कर्म किया गया था.
इन पर गंभीर आरोप हैं, ऐसे में इन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए.
इसके बाद अदालत ने कहा कि इन पर गंभीर आरोप हैं.
इसलिए इनकी जमानत याचिका खारिज की जाती है.
बता दें कि 19 जून 2018 को खूंटी के कोचांग में पांच महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था.
इस मामले में निचली अदालत ने सात मई 2019 को छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.




