Bhojpur: प्राचीन काल से है बखोरापुर काली मंदिर, देवी की है अपरंपार महिमा

Bhojpur: नवरात्रि चल रहा है और इस दौरान भक्त मां की पूजा अर्चना में पूरे भक्ति भाव से जुटे हुए हैं। लोग अपने श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिरों में भी जाते हैं और मां की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसी ही एक मंदिर है भोजपुर में जो डेढ़ सौ वर्ष से भी पुराना है और यहां हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। खास कर नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है और मां के दर्शन कर धन्य होती है। यह मंदिर है भोजपुर का बखोरापुर मंदिर। कहा जाता है कि यह मंदिर करीब 159 वर्ष पुराना है।

2003 में हुआ था पुनरुद्धार

स्थानीय लोग बताते हैं कि मां काली की यह मंदिर 1862 से है। पहले यह मंदिर बहुत छोटा था और यहां देवी मां पिंडी के रूप में स्थापित थी जिसका श्रद्धालु पूजा करते थे। मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता के बाद इस मंदिर का वर्ष 2003 में पुनर्निर्माण कराया गया और अब इस मंदिर ने विशाल और भव्य रूप ले लिया है। इस मंदिर में अब देवी की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां अब भक्तों का तांता लगा रहता है और खास कर नवरात्रि के दौरान यहां लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

हैजा से मिली थी निजात

मंदिर के बारे में कहा जाता है कि वर्ष 1862 के करीब बखोरापुर गांव में हैजा का प्रकोप तेजी से फ़ैल गया। गांव में करीब 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, सैकड़ों लोग बीमार हो गए। उसी दौरान एक साधु गांव में आए और उन्होंने मां काली की पिंडी स्थापित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि गांव में माता का मंदिर स्थापित कर पूजा अर्चना करने से बीमारी का कहर खत्म हो जायेगा।

साधु के कहने पर गांव के लोगों ने नीम के पेड़ के पीछे मां काली की नौ पिंडी स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू कर दी। इसके कुछ दिनों बाद से ही गांव में बीमारी का प्रकोप खत्म होने लगा साथ ही साधु भी गायब हो गए।

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अपरंपार है महिमा

लोग कहते हैं कि मंदिर और देवी मां की महिमा अपरंपार है। यहां माता लोगों की हर तरह से सुरक्षा करती हैं। लोगों ने बताया कि वर्ष 2004 में मंदिर परिसर में काली सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा था जिसमें लोगों की भारी भीड़ जुटी थी। इसी दौरान वहां करीब 32 फीड लंबा एक महुआ का पेड़ टूट कर गिर गया। इस पेड़ पर भी करीब 200 लोग बैठे थे लेकिन किसी को कुछ नहीं हुआ। बस हल्की फुल्की चोटें आई, और सब स्वस्थ थे।

पहुंचने का रास्ता

बखोरापुर मंदिर आरा रेलवे स्टेशन से करीब 12 किलोमीटर उत्तर बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर में है। यहां जाने के लिए आरा रेलवे स्टेशन से और गांगी के पास से कई वाहन मंदिर तक जाता है। मंदिर के आसपास पूजा सामग्री की दुकाने, होटल समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। मंदिर के महंत श्याम बाबा ने कहा कि बखोरापुर की मां काली एक ग्रामीण देवी हैं, यहां पूजा पथ प्राचीन समय से हो रही है।

मंदिर ट्रस्ट आपदा में करता है लोगों की मदद

मां काली मंदिर बखोरापुर के प्रांगण में बाढ़ से पीड़ित लोगों को जय मां काली बखोरापुर वाली के बैनर तले मंदिर ट्रस्ट की तरफ से आपदा विपदा के समय में मदद भी की जाती है। यह मंदिर हमेशा लोगों के सुख दुःख में भागीदार बनता है और उनकी मदद के लिए तैयार रहता है।

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भोजपुर से नेहा की रिपोर्ट

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