Godda: जिले के मेहरमा प्रखंड अंतर्गत सिमानपुर पंचायत से मनरेगा योजना में बड़े घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पंचायत के मुखिया मुन्ना पासवान पर नाबालिग बच्चों की जन्मतिथि में छेड़छाड़ कर फर्जी जॉब कार्ड बनवाने और उनके नाम पर मनरेगा की राशि की अवैध निकासी करने का गंभीर आरोप साबित हुआ है। जांच के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए मुखिया को निलंबित कर दिया है।
जन्मतिथि में हेराफेरी कर की गई मनरेगा की लूट:
जांच में सामने आया है कि आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि में हेरफेर कर नाबालिग बच्चों को बालिग दिखाया गया और उनके नाम से मजदूर जॉब कार्ड जारी कर दिए गए। इसके बाद इन फर्जी जॉब कार्डों के जरिए मनरेगा की राशि निकाल ली गई। यह पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से किया गया, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी सामने आई है।
जांच रिपोर्ट के बाद हुई बड़ी कार्रवाई:
मामले के उजागर होने के बाद अनुमंडल पदाधिकारी ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर मुखिया मुन्ना पासवान से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उनका जवाब प्रशासन को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद उपायुक्त के आदेश पर मुखिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के साथ ही मुखिया मुन्ना पासवान के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं।
मिलीभगत का आरोप, कई नाम जांच के घेरे में:
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, इस घोटाले में मुखिया मुन्ना पासवान के साथ रोजगार सेवक मोहम्मद खालिद हुसैन, पंचायत सचिव चंदन ठाकुर और मजदूर संगीता देवी की मिलीभगत सामने आई है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि से छेड़छाड़ कर नाबालिगों के नाम पर मनरेगा मजदूर दिखाकर सरकारी राशि की अवैध निकासी की।
स्थानीय लोगों में आक्रोश:
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा गरीबों और जरूरतमंदों की रोज़ी-रोटी का सहारा है। यदि इसी योजना में घोटाला किया जाए, तो यह सीधे तौर पर गरीबों के हक पर हमला है। लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और घोटाले की पूरी राशि की वसूली की मांग की है।
अब प्रशासन के सामने कई सवाल:
हालांकि मुखिया की कुर्सी चली गई है और अधिकार छीन लिए गए हैं, लेकिन बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—
क्या घोटाले से निकाली गई राशि की वसूली होगी? क्या इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आएंगे? मनरेगा में हुआ यह घोटाला न सिर्फ सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन गया है।
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