Bihar Fish Farming, पटना: बिहार में मछली पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और मत्स्य उत्पादन में तेजी लाने की तैयारी है। राज्य सरकार की मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 9,685 किसानों और मछुआरों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने आवेदन आमंत्रित किए हैं। योजना के तहत राज्य के भीतर और बाहर के प्रतिष्ठित मत्स्य संस्थानों में कुल 332 बैचों में प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना, उत्पादन बढ़ाना और मछली पालन को अधिक लाभकारी व्यवसाय बनाना है।
आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन बढ़ाने पर जोर
मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना के माध्यम से किसानों को मछली पालन की नवीनतम वैज्ञानिक विधियों से परिचित कराया जाता है। प्रशिक्षण में बताया जाता है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर कम लागत में बेहतर उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ मत्स्य पालकों की वार्षिक आय में सुधार करना है। प्रशिक्षण निःशुल्क है। विभाग के अनुसार, निबंधन शुल्क के अलावा लाभार्थियों से कोई अन्य राशि नहीं ली जाती है। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक तरीकों और बेहतर प्रबंधन को अपनाकर मत्स्य पालन से जुड़े किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इसी दिशा में राज्य और देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है।
अब तक 70 हजार से अधिक मत्स्य पालक प्रशिक्षित
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अब तक 70,221 मत्स्य पालकों को आधुनिक मछली पालन का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें 52,485 किसानों को राज्य के भीतर और 17,726 किसानों को राज्य के बाहर स्थित संस्थानों में प्रशिक्षण मिला है। इसके अलावा भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम के तहत 47,409 से अधिक मत्स्य पालकों को विकसित आर्द्रभूमि और बायोफ्लॉक इकाइयों की कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन की इकाइयों को देखने और उनकी निर्माण प्रक्रिया समझने का अवसर मिला।
बिहार में मछली उत्पादन 10.28 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा
बिहार में मछली उत्पादन के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। विभाग के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल मछली उत्पादन 9.69 लाख मीट्रिक टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 10.28 लाख मीट्रिक टन हो गया। मत्स्य पालन के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 8,262 हेक्टेयर नए जल क्षेत्र का सृजन किया गया है। इसके साथ 4,305 हेक्टेयर में नए तालाब बनाए गए और 2,380 हेक्टेयर चौर भूमि में आधुनिक तालाबों का निर्माण हुआ है। मछली पालन से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार के लिए 5,301 ट्यूबवेल भी स्थापित किए गए हैं।
मत्स्य बीज और फिश फीड उत्पादन को मिला बढ़ावा
राज्य में मछली पालन के लिए गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज और आहार की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार, बिहार की 233 मत्स्य बीज हैचरियों से लगभग 70 प्रतिशत उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज की जरूरत पूरी हो रही है। वहीं, राज्य में संचालित 89 फिश फीड मिलों के माध्यम से 50 हजार टन से अधिक गुणवत्तापूर्ण मत्स्य आहार का उत्पादन किया जा रहा है। इससे मछली पालकों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। सरकार का लक्ष्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के जरिए बिहार में मत्स्य पालन को मजबूत करना है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ इस क्षेत्र में जुड़े किसानों और मछुआरों के लिए आय के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।


















