Bihar Gram Sansad 2026, पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना के ताज सिटी सेंटर में आयोजित ‘ग्राम संसद-बिहार चैप्टर-V’ मुखिया संवाद कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों के विकास के लिए ठोस सुझाव देने और वर्ष 2037 तक बिहार को समृद्ध, सशक्त एवं विकसित बनाने में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, पंचायतों की भूमिका, रोजगार, शिक्षा और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
ग्राम संसद से गांवों के विकास के लिए सुझाव देने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्राम संसद के माध्यम से गांवों की वास्तविक समस्याओं और विकास की जरूरतों से जुड़े ठोस सुझाव सामने आने चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और मुखिया के पास अपने क्षेत्र के विकास तथा लोगों की समस्याओं के समाधान की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने पंचायत स्तर पर राजस्व के नए स्रोत विकसित करने के लिए भी सुझाव मांगे। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे कचरा प्रबंधन, पेयजल, बिजली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आम लोगों पर अतिरिक्त कर लगाने के पक्ष में नहीं है।

परिसीमन के बाद ही कराया जाएगा अगला पंचायत चुनाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगला पंचायत चुनाव परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष नगर निकायों में भी परिसीमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे पंचायत और नगर निकाय क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण हो सके।
उन्होंने कहा कि लगभग 7,500 की आबादी पर एक पंचायत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। पंचायतों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायती राज विभाग में Engineering Cell विकसित किया जाएगा। इससे मुखिया को योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग मिल सकेगा।
हर पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर होगा काम
मुख्यमंत्री ने ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसके तहत प्रत्येक पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के रख-रखाव, रंगाई-पुताई तथा आधारभूत सुविधाओं को निर्धारित समय सीमा में बेहतर बनाना शामिल है।
जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित होने वाले इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने की बात कही गई। असंतुष्ट आवेदकों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम आयोजित करने की भी जानकारी दी गई।
हर महीने ग्राम सभा की बैठक और पंचायत भवनों के रख-रखाव पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक महीने के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत वर्ष में कम से कम 12 बार ग्राम सभा की बैठक कर गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।
उन्होंने पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के साथ-साथ उनके रख-रखाव पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना रखने की अपील की, ताकि सड़क, जल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो सके।

शिक्षा, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा के संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि राज्य के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। नए निजी और सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले एक करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराना है।
कृषि क्षेत्र में किसानों को 55 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने और कृषि फीडरों को सोलराइज करने की दिशा में काम किए जाने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार में प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं में बिहार में निर्मित उत्पादों की कम से कम 30 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा। छड़ और सीमेंट सहित स्थानीय उत्पादों को सरकारी टेंडर प्रक्रिया में प्राथमिकता देने की व्यवस्था तैयार की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत और वर्ष 2037 तक समृद्ध बिहार के निर्माण में पंचायत प्रतिनिधियों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गांव की समृद्धि ही देश की समृद्धि है और गांव विकसित होंगे, तभी देश का विकास संभव होगा। कार्यक्रम को उच्च शिक्षा सह विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, विधान पार्षद एवं ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख, ग्राम संसद के उपाध्यक्ष दीपक ठाकुर और नेशनल ब्रांड एम्बेस्डर किरण प्रभाकर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुखिया, सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।



















