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Bihar Rhino Conservation: वीटीआर में बनेगा गैंडा संरक्षण क्षेत्र, राजगीर जू सफारी में भी जल्द दिखेगा Rhino

Bihar Rhino Conservation, पटना: बिहार में गैंडा संरक्षण को चिड़ियाघरों से आगे बढ़ाकर प्राकृतिक अधिवास तक ले जाने की तैयारी तेज कर दी गई है। वाल्मीकिनगर व्याघ्र आरक्ष यानी वीटीआर में गैंडा पुनर्वास और संरक्षण कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में वन विभाग काम कर रहा है। इसके लिए अगले एक से दो महीने में विस्तृत कार्ययोजना तैयार किए जाने की बात कही गई है। योजना के तहत असम और पश्चिम बंगाल से गैंडे लाकर वीटीआर में एक विशेष संरक्षित क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है। इसके साथ ही राजगीर जू सफारी में भी गैंडा लाने और उसके संरक्षण की योजना बनाई जा रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद ने पटना जू में आयोजित विश्व गैंडा दिवस कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी।

वीटीआर में पहले से रह रहे हैं दो गैंडे

कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरविंद सिंह ने बताया कि नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान दो गैंडे वाल्मीकिनगर व्याघ्र आरक्ष में आकर रह रहे हैं। दोनों गैंडे नर हैं। उन्होंने बताया कि वीटीआर की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक अधिवास और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए करीब दो वर्ष पहले यहां गैंडा संरक्षण की संभावनाओं का आकलन कराया गया था। अध्ययन में वीटीआर में गैंडा संरक्षण की पर्याप्त संभावनाएं सामने आई थीं। इसी आधार पर अब गैंडा पुनर्वास कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य गैंडा संरक्षण को केवल चिड़ियाघरों तक सीमित न रखकर प्राकृतिक वन क्षेत्रों में भी मजबूत करना है। लक्ष्य रखा गया है कि अगले विश्व गैंडा दिवस से पहले वीटीआर और राजगीर जू सफारी में संरक्षण योजनाओं को जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस प्रगति हो।

पटना जू में अब तक 34 गैंडे, 25 का जन्म यहीं

पटना जू लंबे समय से गैंडा संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 1979 में पहली बार असम से गैंडे का एक जोड़ा पटना जू लाया गया था। इसके बाद वर्ष 1982 में बेतिया से एक गैंडे को बचाकर पटना जू में लाया गया। इस तरह यहां गैंडों की संख्या तीन हो गई थी। इसके बाद पटना जू में व्यवस्थित प्रजनन कार्यक्रम शुरू हुआ और गैंडों की संख्या बढ़ती गई। अब तक पटना जू में कुल 34 गैंडे रखे गए हैं, जिनमें 25 का जन्म पटना जू में ही हुआ है। पटना जू से एनिमल एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत रांची, दिल्ली, कानपुर, हैदराबाद, मैसूर और चेन्नई समेत कई चिड़ियाघरों को गैंडे उपलब्ध कराए गए हैं। अमेरिका के सैन डिएगो जू को भी पटना जू से गैंडा दिया गया है।

Bihar Rhino Conservation

वर्ष 2019 से संचालित है राइनो ब्रीडिंग सेंटर

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार ने बताया कि पटना जू में वर्ष 2019 में गैंडा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की स्थापना की गई थी। इसके बाद से राइनो ब्रीडिंग सेंटर का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। पटना जू में गैंडा संरक्षण और प्रजनन के दौरान अर्जित अनुभव का उपयोग अब बिहार के अन्य वन क्षेत्रों में प्राकृतिक अधिवास आधारित संरक्षण को आगे बढ़ाने में किया जाएगा। इससे वीटीआर जैसे वन क्षेत्रों में गैंडा संरक्षण की संभावनाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

मंत्री ने गैंडे को खिलाया चारा, कर्मियों को किया सम्मानित

विश्व गैंडा दिवस कार्यक्रम के दौरान मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद पटना जू के गैंडा बाड़े में पहुंचे और अपने हाथों से गैंडे को चारा खिलाया। उन्होंने गैंडों के संरक्षण, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में गैंडा संरक्षण में योगदान देने वाले दैनिक कर्मियों और चिकित्सकीय पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। मंत्री ने कहा कि संरक्षण कार्य में प्रत्यक्ष रूप से जुड़े कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

Bihar Rhino Conservation 1

गैंडा संरक्षण से बढ़ेगा वन्यजीव पर्यटन

कार्यक्रम में बताया गया कि दुनिया में गैंडों की पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें भारतीय एक सींग वाला गैंडा पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। विश्व में गैंडों की कुल संख्या करीब 28 से 30 हजार के बीच बताई जाती है, जबकि भारतीय एक सींग वाले गैंडों की संख्या लगभग चार हजार है। गैंडे की सींग के लिए होने वाला अवैध शिकार लंबे समय से इसकी आबादी के लिए खतरा रहा है। हालांकि संरक्षण और सुरक्षा उपायों के कारण कई क्षेत्रों में गैंडों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। बिहार में गैंडा संरक्षण का विस्तार होने से जैव विविधता संरक्षण के साथ वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। भविष्य में वीटीआर और राजगीर जू सफारी गैंडा दर्शन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित हो सकते हैं। इससे पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी विस्तार की उम्मीद है। कार्यक्रम में विभाग के मुख्य वन संरक्षक आईटी एस. चंद्रशेखर, विशेष सचिव आलोक कुमार, मुख्य वन संरक्षक अमित कुमार, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक पटना डॉ. नेसामणि, जू निदेशक हेमंत पाटिल, बिहार वेटनरी कॉलेज के डीन डॉ. पल्लव शेखर सहित विभागीय पदाधिकारी, पशु चिकित्सक, वनकर्मी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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