Bihar New Sugar Mills: रैयाम-सकरी में फिर शुरू होगी चीनी मिलों की तैयारी, जानिए किसानों को क्या मिलेगा फायदा

Bihar New Sugar Mills: राज्य सरकार ने बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं। सहकारिता विभाग ने दरभंगा के रायम और मधुबनी के सकरी में नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने की परियोजनाओं की समीक्षा की। सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और निर्देश दिया कि सभी ज़रूरी काम तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। यह पहल ‘सात निश्चय-3’ (Seven Resolves-3) योजना के तहत ‘समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार’ लक्ष्य के अनुरूप है। इस योजना का मकसद इन प्रस्तावित चीनी मिलों के ज़रिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है, साथ ही गन्ना किसानों की मदद करना भी है।

रायम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की तैयारी

राज्य कैबिनेट ने रायम और सकरी में पहले से बंद मिलों की ज़मीन पर नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने का फ़ैसला किया है। दोनों परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट (feasibility reports) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) तैयार करने की मंज़ूरी दे दी गई है। नई मिलों की स्थापना के संबंध में कार्रवाई इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से की जा रही है। इसके अलावा, प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन को भी मंज़ूरी दी गई है। सरकार इन परियोजनाओं को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती; इन्हें एकीकृत कृषि-आधारित औद्योगिक मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है।

Bihar New Sugar Mills: रैयाम-सकरी में फिर शुरू होगी चीनी मिलों की तैयारी, जानिए किसानों को क्या मिलेगा फायदा

₹852.43 करोड़ की प्रस्तावित लागत

रायम और सकरी में प्रस्तावित दो सहकारी चीनी मिलों की कुल परियोजना लागत लगभग ₹852.43 करोड़ आंकी गई है। इसमें से रायम परियोजना की अनुमानित लागत ₹504.67 करोड़ है, जबकि सकरी परियोजना पर लगभग ₹347.76 करोड़ की लागत आने की उम्मीद है। औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के अलावा, इन परियोजनाओं का मकसद गन्ना उत्पादन, कृषि सेवाओं और परिवहन से जुड़े कार्यों में तेज़ी लाना है। इनसे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।

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IPL के साथ MoU और ज़मीन हस्तांतरण की प्रक्रिया

समीक्षा बैठक के दौरान, इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के साथ प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MoU) की प्रगति का भी आकलन किया गया। विभाग के अनुसार, समझौता ज्ञापन (MoU) का मसौदा तैयार कर लिया गया है और संबंधित मंत्री ने इसे मंज़ूरी दे दी है। इसके बाद, मंज़ूरी प्राप्त मसौदा IPL को उनकी सहमति के लिए भेजा गया है। रायम और सकरी चीनी मिलों की ज़मीन को 30 साल की लीज़ पर IPL को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रोजेक्ट के अलग-अलग चरणों में शामिल विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखते हुए काम को तय समय सीमा के भीतर आगे बढ़ाएं।

 

27,980 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया

नई सहकारी चीनी मिल परियोजनाओं के लिए किसानों की भागीदारी को एक अहम आधार माना जाता है। इसी मकसद से रायम और सकरी के कमांड एरिया में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियां बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक दोनों इलाकों से कुल 27,980 ऑनलाइन आवेदन मिल चुके हैं। इनमें से 12,264 किसानों ने रायम कमांड एरिया से और 15,716 किसानों ने सकरी कमांड एरिया से आवेदन किया है। इन आवेदनों की जांच-पड़ताल की प्रक्रिया अभी चल रही है। सहकारिता विभाग के अनुसार, किसानों की इतनी बड़ी भागीदारी इन परियोजनाओं में उनकी गहरी दिलचस्पी को दिखाती है।

गन्ना किसानों को मिलेंगी कई तरह की सुविधाएं

प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियां किसानों से संबंधित चीनी मिलों तक गन्ने की सप्लाई को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा, किसानों को बेहतर गन्ना बीज, खेती के लिए ज़रूरी सामान, तकनीकी मदद, मिट्टी की जांच, ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम जैसी सुविधाएं देने की भी योजना है। गांव-वार गन्ने के रकबे का आकलन करने और गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के लिए क्षेत्र विस्तार की योजना बनाने का काम भी किया जाएगा। किसानों को संस्थागत लोन दिलाने के लिए सहकारी बैंकों के साथ तालमेल बिठाया जाएगा। खेती में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ‘कस्टम हायरिंग सेंटर्स’ के ज़रिए कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने की भी कोशिश की जाएगी। इस तरह, रायम और सकरी चीनी मिल परियोजनाओं को किसान-केंद्रित मॉडल के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है, जिसमें सहकारी, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों को एक साथ जोड़ा जाएगा।

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