Key Highlights
- पश्चिम चंपारण के किशन कुमार शिव शक्ति चूड़ा उद्योग के माध्यम से मर्चा चूड़ा का कारोबार कर रहे हैं।
- वर्ष 2023 में जीआई टैग मिलने के बाद मर्चा चूड़ा की पहचान देश-विदेश में मजबूत हुई।
- किशन कुमार के अनुसार, अब मर्चा चूड़ा के लिए विदेशों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं।
- मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में पात्र लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है, जिसमें 5 लाख रुपये अनुदान और 5 लाख रुपये ब्याज-मुक्त ऋण शामिल हैं।
- योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण समेत 54 प्रकार के उद्योगों में कारोबार शुरू करने के अवसर उपलब्ध हैं।
Bihar News चंपारण : बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का प्रसिद्ध मर्चा चूड़ा अब स्थानीय पहचान से आगे बढ़कर देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच रहा है। इसकी खास सुगंध, स्वाद और गुणवत्ता ने इसे एक विशिष्ट उत्पाद बनाया है। वर्ष 2023 में मर्चा चूड़ा को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मजबूत हुई है। पश्चिम चंपारण के किशन कुमार ने इसी पारंपरिक उत्पाद को अपने व्यवसाय का आधार बनाकर सफलता की राह बनाई है। उनकी कहानी बताती है कि स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर स्वरोजगार और रोजगार सृजन के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
Bihar News:मर्चा चूड़ा के कारोबार से किशन कुमार ने बनाई पहचान
पश्चिम चंपारण के निवासी किशन कुमार शिव शक्ति चूड़ा उद्योग के संचालक हैं। वह मर्चा चूड़ा का उत्पादन और कारोबार करते हैं। किशन कुमार के अनुसार, जीआई टैग मिलने के बाद इस उत्पाद की पहचान देश-विदेश में बढ़ी है और अब विदेशों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं।
किशन कुमार बताते हैं कि मर्चा चूड़ा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनोखी सुगंध है। इसका दाना छोटा होता है और गोलकी मिर्च के दाने जैसा दिखाई देता है। मर्चा धान की खेती सावन महीने में शुरू होती है और नवंबर के अंत तक फसल तैयार हो जाती है। इसकी फसल को तैयार होने में लगभग 145 से 150 दिन लगते हैं।
किशन कुमार ने मर्चा चूड़ा को नई पहचान मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने बिहार में कारोबार को आसान बनाने के प्रयासों के लिए सम्राट चौधरी का भी धन्यवाद किया।
मर्चा चूड़ा की बढ़ती मांग स्थानीय किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों और छोटे उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। सही पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और ऑनलाइन बाजार तक पहुंच के जरिए इस पारंपरिक उत्पाद को बड़े कारोबार में बदला जा सकता है।
Bihar News:मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से 10 लाख रुपये तक की सहायता
बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को उद्योग स्थापित करने के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। इसमें 5 लाख रुपये अनुदान और शेष 5 लाख रुपये ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में दिए जाते हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना के तहत अब तक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के 14 हजार, अतिपिछड़ा वर्ग के 10 हजार, महिला उद्यमियों के 9,500, युवाओं के 9 हजार और अल्पसंख्यक समुदाय के 2,500 उद्यमियों को लाभ पहुंचाया गया है।
यह योजना उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो मर्चा चूड़ा जैसे स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बिक्री के लिए अपनी इकाई स्थापित करना चाहते हैं। हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित श्रेणी, परियोजना और योजना के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्रता पूरी करना आवश्यक है।
Bihar News:मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत आवेदन करने के लिए आवेदक का बिहार का स्थायी निवासी होना जरूरी है। योजना के विभिन्न घटकों में निर्धारित श्रेणियों के आवेदकों को लाभ दिया जाता है।
प्रमुख पात्रता शर्तें इस प्रकार हैं:
- आवेदक की उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- आवेदक के पास कम से कम इंटरमीडिएट या निर्धारित समकक्ष शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए।
- आवेदक के नाम पर या उसकी फर्म के नाम पर बैंक में चालू खाता होना चाहिए।
- संबंधित योजना श्रेणी और परियोजना के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करनी होगी।
- आवेदन के समय आवश्यक दस्तावेज और परियोजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
Bihar News:54 प्रकार के उद्योगों में कारोबार शुरू करने का अवसर
योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण से लेकर आईटी क्षेत्र तक विभिन्न श्रेणियों में उद्योग स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें 54 प्रकार के उद्योग शामिल हैं।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आटा, बेसन, सत्तू, मसाला, नमकीन, जैम, जेली, सॉस, नूडल्स, पापड़, अचार, मुरब्बा, फलों के जूस और मिठाई के निर्माण जैसी इकाइयां शामिल हैं।
इसके अलावा फर्नीचर और लकड़ी से जुड़े उद्योगों में बढ़ईगिरी, बांस से बने उत्पाद, नाव निर्माण और बेंत के फर्नीचर से संबंधित व्यवसाय शुरू करने के लिए भी निर्धारित प्रावधानों के तहत आवेदन किया जा सकता है।
मर्चा चूड़ा की बढ़ती मांग को देखते हुए इससे जुड़े प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन कारोबार में भी संभावनाएं हैं। हालांकि, इस विशिष्ट उद्योग की पात्रता और उपलब्ध सहायता की पुष्टि आवेदन से पहले योजना की आधिकारिक सूची से करनी चाहिए।
स्थानीय उत्पादों से रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
मर्चा चूड़ा की सफलता बिहार के पारंपरिक उत्पादों में छिपी कारोबारी संभावनाओं को सामने लाती है। स्थानीय उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
किशन कुमार जैसे उद्यमियों का अनुभव बताता है कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित व्यवसाय भी बड़े बाजार तक पहुंच सकते हैं। सरकारी योजनाओं की जानकारी, सही व्यावसायिक योजना और बाजार की मांग को समझकर युवा अपना उद्योग स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।


















