रिकॉर्ड संख्या में अपराधियों को दबोचने में जुटी बिहार पुलिस

पटना. सूबे में अपराधियों को दबोचने के लिए पुलिस के स्तर से निरंतर कई स्तर की रणनीति तैयार कर इसे अंजाम तक पहुंचाने में जुटी है। इसका नतीजा है कि इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक विभिन्न तरह के अपराधों के 2 लाख 28 हजार 188 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें 8 हजार 823 हार्डकोर अपराधी और 141 नक्सली शामिल हैं। दबोचे गए कुल अपराधियों में हार्डकोर अपराधियों का प्रतिशत करीब 40 है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। हार्डकोर अपराधियों को दबोचने पर पुलिस महकमा का फोकस अधिक है। जिन नक्सलियों को दबोचा गया है, उसमें एक से डेढ़ दर्जन नक्सली इनामी हैं। कुछ पर तो 1 से 2 लाख रुपये तक का इनाम है। अगस्त से अब तक का आंकड़ा जोड़ने पर इस संख्या में बढ़ोतरी होगी।

पिछले दो-तीन वर्ष के दौरान गिरफ्तार हुए अपराधियों एवं कुख्यात अपराधियों के औसत की तुलना मौजूदा वर्ष से करें, तो यह कहीं अधिक है। पिछले वर्ष 2024 में पूरे साल के दौरान 3 लाख 35 हजार अपराधियों को दबोचा गया था। वहीं, इस वर्ष शुरुआती 7 महीने यानी जनवरी से जुलाई तक 2.28 लाख से अधिक अपराधी गिरफ्तार हो चुके हैं। वर्ष समाप्त होने पर यह संख्या दोगुना तक पहुंच सकती है। यह संख्या पिछले दो-तीन वर्ष के दौरान हुई गिरफ्तारी से अधिक होगी। इसी तरह 2023 में 3 लाख 51 हजार 424 और 2022 में 3 लाख 46 हजार 332 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था।

अपराधियों खासकर हार्डकोर अपराधियों की निरंतर गिरफ्तारी के साथ ही अवैध कारतूस एवं हथियार की बरामदगी पर भी अधिक फोकस किया जा रहा है। इस वर्ष जुलाई तक 16 हजार 301 कारतूस बरामद किए गए हैं। इसी तरह 2024 में 26 हजार 702, 2023 में 30 हजार 201 और 2022 में 28 हजार 200 कारतूस बरामद किए गए हैं। अवैध हथियारों के बरामदगी की स्थिति देखें, तो चालू वर्ष में जुलाई तक 2625, 2024 में 4917, 2023 में 4813 और 2022 में 4288 हथियार बरामद किए जा चुके हैं। इस वर्ष शुरुआती सात महीने में 38 नियमित या पुलिस से छिने या चुराए गए हथियारों को भी अपराधियों के पास से बरामद किए गए हैं।

अवैध मिनीगन फैक्ट्री के खिलाफ भी लगातार कार्रवाई जारी है। जुलाई 2025 तक 36, 2024 में 114, 2023 में 55 और 2022 में 32 मिनीगन फैक्ट्री का खुलासा करते हुए कार्रवाई की गई है।

अपराधियों खासकर हार्डकोर अपराधियों को गिरफ्तार करने पर खासतौर से फोकस किया जा रहा है। सभी थानों को ऐसे अपराधियों की सूची बनाकर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। मुहिम चलाकर लंबे समय से फरार चल रहे सभी स्तर के अपराधियों को दबोचने की मुहिम चल रही है। इसमें स्थानीय पुलिस के साथ एसटीएफ की भी भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।

पंकज कुमार दराद (एडीजी (विधि व्यवस्था), बिहार पुलिस)

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