खेलो इंडिया ASMITA गेम्स में बिहार की बेटियों का जलवा, जीता रजत पदक

पटना : गुवाहाटी में आयोजित जूनियर ईस्ट जोन खेलो इंडिया (ASMITA) गेम्स में रजत पदक जीतकर बिहार की जूनियर हॉकी गर्ल्स टीम ने न सिर्फ एक उपलब्धि अपने नाम की, बल्कि राज्य के खेल इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ा। विकास भवन में आयोजित मुलाकात के दौरान जब बिहार सरकार के खेल विभाग के सचिव महेंद्र कुमार और निदेशक खेल आरिफ अहसन ने इन खिलाड़ियों से संवाद किया तो माहौल गर्व, आत्मविश्वास और भविष्य की उम्मीदों से भरा नजर आया।

गुवाहाटी से रजत पदक तक

टूर्नामेंट में बिहार की टीम का सफर आसान नहीं रहा। पूल मैचों में टीम ने त्रिपुरा और असम को हराकर दमदार अंदाp में फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल मुकाबले में ओडिशा जैसी मजबूत टीम से हार जरूर मिली, लेकिन बिहार की खिलाड़ियों ने अपने जुझारूपन और तकनीकी खेल से सभी का ध्यान खींचा। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए भारत सरकार और ओडिशा सरकार की ओर से खिलाड़ियों को कुल 1.44 लाख रुपए की नकद प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।

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बिहार की जूनियर हॉकी टीम की जीत की कहानी

बीते कुछ वर्षों में बिहार हॉकी के एक उभरते केंद्र के रूप में सामने आया है। महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और हीरो एशिया कप हॉकी जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफल मेजबानी ने राज्य की खेल क्षमताओं को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाई है। अब इस मजबूत आधार पर बिहार की उभरती हॉकी प्रतिभाओं को दिग्गज कोच हरेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित किए जाने की तैयारी है, जिससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सके।

हॉकी बिहार के अध्यक्ष सह मंत्री श्रवण कुमार ने भी खिलाड़ियों को किया सम्मानित

इस अवसर पर हॉकी बिहार के अध्यक्ष सह ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक ने टीम को बधाई देते हुए भरोसा दिलाया कि खिलाड़ियों को आगे भी हर संभव सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

कोच, टर्फ और टैलेंट

खिलाड़ियों और अधिकारियों के बीच संवाद केवल औपचारिक नहीं रहा, बल्कि यह जमीनी जरूरतों पर केंद्रित था। टीम कोच अनंत कुमार ने विभिन्न जिलों में मौजूद हॉकी प्रतिभाओं, उनके पोषण और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर विस्तार से बात रखी। वहीं टीम मैनेजर तमन्ना राज ने खिलाड़ियों के निरंतर बेहतर प्रदर्शन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण संरचना और सहयोग की अहमियत को रेखांकित किया।

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कैसे तैयार हुई बिहार की रजत पदक विजेता हॉकी टीम?

सचिव महेंद्र कुमार ने खिलाड़ियों से व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत करते हुए उनके खेल अनुभवों को जाना कितने गोल किए, कितने पेनल्टी कॉर्नर मिले, वे किस जिले से आती हैं और कहां प्रशिक्षण लेती हैं। खिलाड़ियों ने साझा किया कि राजगीर हॉकी टर्फ पर मिला प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत पेशेवर और निर्णायक साबित हुआ। राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय मानक का हॉकी टर्फ आज बिहार की हॉकी पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है। इसी क्रम में पटना में भी इसी स्तर का नया हॉकी टर्फ तेजी से विकसित किया जा रहा है।

बिहार की बालिका खिलाड़ियों को आगे भी हर संभव सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण व संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे – खेल विभाग

खेल विभाग का स्पष्ट संदेश है कि बिहार की बालिका खिलाड़ियों को आगे भी हर संभव सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राज्य का नाम रोशन करती रहें। रजत पदक से शुरू हुई यह यात्रा बिहार की हॉकी बेटियों के लिए स्वर्णिम भविष्य की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

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