रांचीः विधानसभा भवन में नमाज़ कक्ष आवंटन को लेकर मचा विवाद अब थमता नज़र आ रहा है। लेकिन मौजूदा सत्र का बड़ा हिस्सा इस मुद्दे की भेंट चढ़ गया। इस मामले को लेकर सदन की कार्यवाही बार- बार बाधित होती रही। विवाद पर विराम लगाने की पहल भी हुई तो सत्र के आखिरी दिन। सत्ता पक्ष के विधायक सरफराज अहमद ने स्पीकर से कहा कि नमाज कक्ष के लिए जो कमरा आवंटित किया गया है, इससे राज्य धार्मिक उन्माद की ओर बढ़ रहा है। इसलिए विधानसभा की एक कमेटी बना कर रीनोटिफिकेशन जारी किया जाए। यह व्यवस्था तब भी थी जब बाबूलाल मुख्यमंत्री थे।
जेवीएम विधायक प्रदीप यादव ने सरफराज अहमद का समर्थन करते हुए कहा कि ये लोकतंत्र की खूबसूरती ही है कि जिस समुदाय के लिए कक्ष आवंटित किया गया है, अब वही पुनर्विचार की मांग कर रहा है।
भले ही मामला तो शांत होता दिख रहा हो, लेकिन बीजेपी अपना क्रेडिट लेने में भी पीछे रहना नहीं चाहती। बीजेपी विधायक भानू प्रताप शाही ने कहा कि यह निर्णय पहले दिन भी लिया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब जो हो रहा है वह बीजेपी के दवाब का नतीजा है, सरफ़राज़ अहमद ने जो कहा वह पहले दिन भी कह सकते थे।
जबकि बीजेपी विधायक बाबूलाल मरांडी ने कहा ये राज्य कोई धर्म विशेष का राज्य नहीं है, संविधान इसकी इजाजत नहीं देता, इसे लोकतंत्र का मंदिर ही रहने दें, यहां सभी धर्मों की रक्षा की जाती है।
कहते हैं अंत भला तो सब भला, नमाज़ कक्ष आवंटन को लेकर विवाद थमता दिख रहा है ये राहत की बात है, लेकिन मौजूदा सत्र का बड़ा हिस्सा इस विवाद की भेंट चढ़ गया।
सदन जनता के मुद्दों को उठाने के लिए है, जन पीड़ा को अभिव्यक्ति देने के लिए है, उसका समाधान खोजने और निराकरण करने के लिए है, लेकिन अफसोस, माननीयों ने इस मुद्दे पर अपनी राजनीति को चमकाया। माननीयों को जो भी शिकायत थी, उसका निराकरण सदन में वाद-संवाद कर किया जा सकता था। इसी के लिए तो उन्हे सदन में भेजा गया है, सड़क की राजनीति तो सदन की कार्यवाही खत्म होने के बाद भी की जा सकती थी।


















