रांचीः विधानसभा में नमाज पढ़ने के लिए कमरा आवंटित करने पर मचे घमासान के बीच आखिरकार सत्ताधारी दल ने कमिटी गठन कर इस मुद्दे पर विराम लगाने की कोशिश की है। विधानसभा में जेएमएम विधायक सरफराज अहमद ने नमाज कक्ष आवंटन के मुद्दे पर कमिटी गठन किये जाने की मांग की। उन्होने बीजेपी पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले की वजह से राज्य का माहौल खराब हो रहा है। इसलिए मसले के हल के लिए कमिटी का गठन किया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने जेएमए विधायक की बात से सहमति जताते हुए एक सर्वदलीय कमिटी के गठन की घोषणा की जो 45 दिन के अंदर अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने कमिटी से तय समय सीमा से पहले ही रिपोर्ट सौंपने का आग्रह किया। 7 सदस्यीय कमिटी में स्टीफन मरांडी, प्रदीप यादव, नीलकंठ सिंह मुंडा, सरफराज अहमद, विनोद सिंह, लम्बोदर महतो और दीपिका पांडे के नाम शामिल हैं। कमिटी जो भी रिपोर्ट सौंपेगी उस पर अध्यक्ष फैसला लेंगे।

क्या जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए दी गई मामले को हवा
विधानसभा सत्र के आखिरी दिन इस तरह की कमिटी का गठन करना कई सवाल खड़े करता है। क्या सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नमाज कक्ष आवंटन के मुद्दे को हवा दे रही थी, या फिर विपक्ष के पास सरकार को घरने के लिए कोई सवाल ही नहीं था। नमाज कक्ष आवंटन के मुद्दे पर पूरा मॉनसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। इस मुद्दे को लेकर बीजेपी ने विधानसभा का घेराव किया और पुलिस की लाठीचार्ज के खिलाफ गुरूवार को काला दिवस मनाया। बीजेपी ने पुलिसिया जुल्म को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा है।
बीजेपी के तुष्टीकरण के आरोप का सत्ताधारी दलों की ओर से जवाब दिया गया। कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, लिहाजा जन मुद्दों को दरकिनार कर धर्म विशेष को लेकर पूरा सत्र बाधित किया गया। हालांकि सत्ता पक्ष के इस आरोप का पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने कहा कि सरकार की नीयत में ही खोंट है। सत्र संचालन को लेकर सत्ता पक्ष गंभीर नहीं दिखा।
अब चाहे जो भी हो, सदन की मर्यादा तो तार-तार हो गई। सदन में जनहित से जुड़े मुद्दों को छोड़कर धर्म के नाम पर पांच दिन के सत्र को बर्बाद कर दिया गया। जिम्मेदारी लेने की बजाए पक्ष-विपक्ष आरोप-प्रत्यारोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। पर इससे जनता के पैसे और हितों का जो नुकसान हुआ है उसकी भारपाई कैसे होगी इसका जवाब न तो सत्ता पक्ष के पास है और न ही विपक्ष के पास।
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