रांची: Excise Policy अब CAG की जांच के घेरे में है। जून 2025 में सीएजी ने झारखंड की उत्पाद नीति का Performance Audit मंजूर किया था। इसके तहत यह आकलन होना है कि नीतिगत बदलावों से राजस्व वसूली कितनी सफल रही और नीति क्रियान्वयन कितना कारगर साबित हुआ।
ऑडिट कब शुरू होगा, संशय बरकरार
रांची पीएजी ने अगस्त 2025 में उत्पाद सचिव को पत्र लिखकर इंट्री कॉन्फ्रेंस बुलाने की बात कही थी। पहले यह प्रक्रिया अगस्त में तय हुई थी, लेकिन उत्पाद विभाग ने इसे आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। विभाग का कहना था कि नई नीति लागू करने के लिए खुदरा दुकानों का बंदोबस्त 31 अगस्त तक पूरा होना जरूरी है, इसलिए ऑडिट अक्टूबर से शुरू किया जाए। इस वजह से तारीख आगे बढ़ाकर 10 सितंबर तय की गई।
हालांकि, 10 सितंबर को हुई इंट्री कॉन्फ्रेंस में विभाग ने साफ किया कि वर्ष 2014 से 2022 तक की फाइलें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ले गया है। इससे ऑडिट प्रक्रिया शुरू होने पर संशय पैदा हो गया है।
2000 से 2025 तक 9 बार बदली Excise Policy
झारखंड राज्य गठन (15 नवंबर 2000) के बाद बिहार की पुरानी उत्पाद नीति लागू रही। इसके बाद 2004 से अब तक 9 बार नीति में बदलाव हुए।
2004: रिटेल दुकानों की अलग-अलग नीलामी समाप्त कर जिला स्तर पर समूह व्यवस्था लागू की गई।
2008: विदेशी और देशी शराब दुकानों के अलग-अलग समूह बनाकर लाइसेंस देने का नियम।
2009: विदेशी शराब की अधिकतम तीन दुकानों का समूह बनाकर लाइसेंस की व्यवस्था।
2010: होलसेल कारोबार निजी हाथों से लेकर राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन को सौंपा गया।
2017: सभी रिटेल दुकानें भी कॉरपोरेशन के अधीन कर दी गईं।
2019: रिटेल दुकानें फिर से निजी हाथों को दी गईं।
2021: होलसेल कारोबार भी निजी क्षेत्र को सौंपा गया।
2022: शराब की हर बोतल पर QR Code हॉलोग्राम अनिवार्य किया गया।
2025 (सितंबर): नई नीति में रिटेल शराब की बिक्री फिर निजी हाथों में दी गई।
राजस्व वसूली पर उठे सवाल
राज्य सरकार ने हर बार नीति बदलने का कारण राजस्व बढ़ाने को बताया, लेकिन व्यवहार में इसका असर उल्टा दिखा। कई बार कॉरपोरेशन को नियंत्रण सौंपने से घाटा बढ़ा, वहीं निजी हाथों में जाने पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए। इस बीच, राजस्व लक्ष्य और वास्तविक वसूली में लगातार अंतर रहा। यही वजह है कि अब सीएजी इसकी परफॉर्मेंस जांच करेगा।
Key Highlights
झारखंड की Excise Policy पर CAG करेगा Performance Audit
2014-22 की सभी फाइलें ACB ने जब्त कीं, ऑडिट प्रक्रिया पर संशय
राज्य गठन के बाद अब तक 9 बार बदली गई उत्पाद नीति
रिटेल और होलसेल कारोबार बार-बार निजी व कॉरपोरेशन के बीच बदला
पहले भी Special Audit में सामने आई थीं गड़बड़ियां
पहले भी सामने आई थीं गड़बड़ियां
उत्पाद विभाग और झारखंड बेवरेजेज कॉरपोरेशन का पहले भी स्पेशल ऑडिट हो चुका है। यह ऑडिट प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ACB की जांच के बाद हुआ था। उस दौरान कई गड़बड़ियों के तथ्य मिले थे, लेकिन ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम से शराब बिक्री का पूरा डेटा और कई जरूरी रिकॉर्ड ऑडिट टीम को नहीं सौंपे गए थे।
आगे की स्थिति
अब देखना यह है कि CAG का नया ऑडिट कब से शुरू होता है। विभागीय सचिव और पीएजी के बीच जरूरी दस्तावेज साझा किए बिना यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। चूंकि 2014 से 2022 तक का डेटा ACB के पास है, ऐसे में ऑडिट की शुरुआत को लेकर असमंजस कायम है।
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