पटना : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज मुख्य सचिवालय स्थित अधिवेशन कक्ष में विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर परियोजना को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर परियोजना के तहत गयाजी स्थित विष्णुपद मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने की योजना की विस्तृत जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा- इस परियोजना के तहत विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में कुल 694 स्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे
अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के तहत विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में कुल 694 स्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे। इनमें कर्मशियल शॉप, वाहन पार्किंग, श्रद्धालुओं एवं पिंडदानियों के लिए शेड, फल्गु नदी घाट का विकास एवं सौंदर्गीकरण, विष्णुपद मंदिर से मानपुर तक नदी घाट का विकास, सीता कुंड क्षेत्र का विकास आदि शामिल है। यह परियोजना करीब 2390 करोड़ रुपए की है। यहां तीन स्थानों पर वाहन पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जहां कुल 750 चार पहिया वाहन के अलावा 20 बसों की पार्किंग भी की जा सकेगी। विष्णुपद मंदिर और सीता कुंड के मध्य फल्गु नदी में भगवान विष्णु की 108 फीट ऊंची मिस्रधातू की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा तक पहुंचने के लिए पेडेस्ट्रियन पथ का निर्माण कराया जाएगा, जहां श्रद्धालु आसानी से जा सकेंगे। यहां 24 शेड का निर्माण कराने की योजना है। एक शेड में 20 लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी।

विष्णुपद मंदिर परिसर, फल्गु नदी के तटीय क्षेत्र एवं आसपास के इलाकों को इस प्रकार से विकसित करें – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री के समक्ष वॉक थ्रू के जरिए विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर परियोजना के तहत पूर्ण कराए जाने वाले कार्य के पश्चात् विकसित क्षेत्र एवं निर्मित स्ट्रक्चर के मॉडल को प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि विष्णुपद मंदिर परिसर, फल्गु नदी के तटीय क्षेत्र एवं आसपास के इलाकों को इस प्रकार से विकसित करें कि मुख्य मंदिर तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से पिंडदान करने वाले लोग व श्रद्धालु भी काफी संख्या में यहां पहुंचते हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर परियोजना का कार्य सुनिश्चित कराएं। विष्णुपद मंदिर और सीता कुंड के मध्य निर्मित होने वाले पेडेस्ट्रियन पथ की चौड़ाई कम से कम 20 फीट हो ताकि लोगों को आवागमन में कोई कठिनाई न हो। पर्याप्त वाहनों के पार्किंग की उपलब्धता सुनिश्चित हो, इसका विशेष रूप से ख्याल रखें। यहां आने वाले श्रद्धालु एवं पिंडदानियों की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्य सुनिश्चित कराएं।

विकसित होंगे 11 सैटेलाइट टॉउनशिप, 2027 तक जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक
राजधानी पटना समेत 11 प्रमुख शहरों के पास राज्य सरकार सैटेलाइट टॉउनशिप विकसित करने जा रही है। इन सभी टॉउनशिप के अपने अलग-अलग नाम होंगे। इससे संबंधित अधिसूचना नगर विकास एवं आवास विभाग के स्तर से जारी होने के साथ ही संबंधित शहरों के आसपास चिन्हित इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण एवं भूमि के विकास या भवनों के निर्माण पर रोक लग जाएगी। यह अधिसूचना विभाग के स्तर से जल्द जारी होने की संभावना है। यह रोक 2027 तक रहेगी। सूबे के नए मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगी, जिसमें सैटेलाइट शहरों से संबंधित एजेंडा को विस्तार दिया गया।

बैठक के बाद इसमें लिए निर्णयों के बारे में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने विस्तृत जानकारी दी
कैबिनेट की बैठक के बाद इसमें लिए निर्णयों के बारे में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर अपने-अपने विभागों से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी देने के लिए संबंधित विभागों के सचिव भी मौजूद थे। नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने बताया कि पटना के पास विकसित होने वाले टॉउनशिप का नाम पाटलिपुत्रा होगा। इसी तरह सोनपुर के टॉउनशिप का नाम हरिहरनाथपुरम, गयाजी का मगध, पूर्णिया का पूर्णिया, छपरा का सारण, सीतामढ़ी का सीतापुरम, सहरसा का कोसी, मुंगेर का अंग, मुजफ्फरपुर का तिरहूत, भागलपुर का विक्रमशीला और दरभंगा के टॉउनशिप का नाम मिथिला रखा गया है। इससे संबंधित विभागीय अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किस शहर में तैयार होने वाले टॉउनशिप का क्या स्वरूप होगा। इसके कोर क्षेत्र का विस्तार विशेष क्षेत्र तक कहां से कहां तक होगा। अधिसूचना में इलाका चिन्हित होने के बाद इन सभी इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री या स्थानांतरण समेत अन्य सभी गतिविधि पर आगामी एक वर्ष के लिए रोक लग जाएगी। मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, छपरा और भागलपुर में यह प्रतिबंध 30 जून 2027 तक के लिए रहेगी। जबकि अन्य जिलों पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में यह रोक 31 मार्च 2027 तक रहेगी। यह रोक जमीन की सीमांकन प्रक्रिया जारी रहने तक रहेगी। अगर किसी शहर में यह प्रक्रिया पहले पूरी कर ली जाती है, तो रोक पहले भी हट सकती है।

प्रधान सचिव ने कहा- हर टॉउनशिप का विस्तार कोर क्षेत्र से विशेष क्षेत्र की तरफ होगा
प्रधान सचिव ने बताया कि हर टॉउनशिप का विस्तार कोर क्षेत्र से विशेष क्षेत्र की तरफ होगा। इसका क्षेत्रफल फिलहाल 800 से 1200 एकड़ तक होगा। भविष्य में इसका विस्तार इससे 10 गुणा अधिक तक किया जा सकता है। टॉउनशिप के लिए जमीन का अधिग्रहण लैंड पुलिंग, ट्रांजिट समेत अन्य माध्यमों से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में टॉउनशिप के विकास से सुनियोजित शहरीकरण एवं मास्टर प्लान आधारित विकास सुनिश्चित होगा। इससे आर्थिक गतिविधि केंद्रों के निर्माण के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन होगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे तथा नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली शहरी सुविधाएं मिलेगी। इनके विकास से मौजूदा शहरों पर भार कम होगा तथा शहरी विस्तार योजनाबद्ध रूप से हो सकेगा। निजी या संस्थागत निवेश में बढ़ोतरी होगी।

75 ITI विकसित होंगे अत्याधुनिक कौशल प्रशिक्षण संस्थान के तौर पर
सूबे के 75 आईटीआई संस्थानों को अत्याधुनिक कौशल प्रशिक्षण केंद्र के तौर पर विकसित किए जाएंगे। इनमें पढ़ने वाले छात्रों को नए जमाने के आधुनिक कोर्सों मसलन एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), सेमि-कंडक्टर, सेल्स-रिटेल, पोशाक तकनीक समेत ऐसे अन्य विषयों की जानकारी दी जाएगी। ताकि वे यहां से निकलकर सीधे रोजगार प्राप्त कर सकें। रोजगारोन्मुखी इन कोर्सों का संचालन प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम- सेतू) योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इसके तहत आने वाले वर्षों में 70 हजार युवाओं को हुनरमंद बनाते हुए शिक्षा प्रदान करने की योजना है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक यह योजना चलेगी
वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक यह योजना चलेगी। इसके संचालन पर तीन हजार 615 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है, जिसमें राज्य सरकार 33 फीसदी यानी एक हजार 192 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी रहेगी। कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित निर्णय लिया गया। इसकी जानकारी युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के सचिव कौशल किशोर ने सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। इस मौके पर सूचना प्रावैधिकी (आईटी) विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने कहा कि पटना स्थित आईआईटी को रिसर्च पार्क के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए आईआईटी को 11 एकड़ भूमि अतिरिक्त प्रदान की जाएगी। इस पर 480 करोड़ 71 लाख रुपए की लागत आएगी, जो राज्य सरकार सहायक अनुदान के तौर पर प्रदान किया जाएगा। इसे इनोवेशन हब के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसमें लाइफ साइंस, हेल्थकेयर, एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, अर्बनाइनेजन बिल्डिंग एंड एनवायरमेंट, कृषि, डेटा एनालिटिक्स समेत अन्य विषय होंगे। इसका विकास होने के बाद यहां 100 कंपनियों को रिसर्च के लिए 20 वर्ष या इससे अधिक के पट्टे पर स्थान उपलब्ध कराकर लाया जाएगा और इससे 10 हजार रोजगार सृजन की संभावना है।

IIT पटना में ही केंद्र सरकार के स्तर से स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्यूफैक्चरिंग इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी
आईटी सचिव ने बताया कि आईआईटी पटना में ही केंद्र सरकार के स्तर से स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्यूफैक्चरिंग इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की तरफ से 25 करोड़ रुपये मैचिंग ग्रांट प्रदान किया जाएगा। इस इन्क्यूबेशन सेंटर के फेज-2 के अंतर्गत कई कार्य किए जाएंगे। इसमें स्टार्टअप में कार्यरत पेशेवरों के लिए हॉस्टल का निर्माण कर भौतिक बुनिदारी ढांचे का विस्तार, डीप टेक पर केंद्रित सीड फंड योजना बनाना और सेमीकंडक्टर स्टार्टअप को सहायता प्रदान करना शामिल है। सीड फंड योजना के तहत पांच वर्षों की अवधि में 80 स्टार्ट अप को सहायता दिया जाएगा। इससे स्टार्ट अप के बीच सहयोग, मार्गदर्शन एवं नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के लिए साकारात्मक वातावरण तैयार होगा। उद्योग और समाज के लिए नए तकनीकी समाधान विकसित होंगे। बाहर से आने वाले उद्यमियों की भागीदारी में बढ़ोतरी होगी। राज्य में निवेश आकर्षित होंगे।

अब 80 वर्ष या इससे अधिक के बुजुर्गों को घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा
अब राज्य में 80 वर्ष या इससे अधिक उम्र के वृद्धजनों को घर बैठे जमीन समेत अन्य किसी तरह का निबंधन कराने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की तरफ से मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट का गठन किया जाएगा। यह विशेष वैन संबंधित बुजुर्ग के घर जाकर उनका बॉयोमैट्रिक प्रिंट लेने के साथ ही सभी संबंधित दस्तावेज जमा करेगी और रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया संपन्न करेगी। राज्य में पहली बार शुरू होने जा रही इस सुविधा से संबंधित निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इसकी जानकारी मंत्रीमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव रविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में दी। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि इसके लिए शुल्क का भुगतान पहले ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। इसके बाद निबंधन की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। पेपरलेस निबंधन की इस प्रक्रिया से पक्षकारों को भौतिक रूप से दस्तावेज तैयार नहीं करना होगा।

पुलिस दीदी को मिलेगी स्कूटी
स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान समेत ऐसे अन्य स्थानों पर विधि-व्यवस्था को बनाए रखने और महिलाओं या लड़कियों की विशेष सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी का गठन किया जा रहा है। इनके लिए 1500 स्कूटी की खरीद की जाएगी। इसके लिए 18 करोड़ 75 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी तरह पुलिसकर्मियों के लिए 3200 मोटरसाइकिल खरीदने के लिए 48 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।
ERSS भवन के लिए 172 करोड़ जारी
पटना के राजीव नगर में ईआरएसएस यानी डॉयल-112 और राज्य पुलिस डाटा सेंटर का स्थाई सात मंजिला भवन तैयार करने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए 172 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा राज्य में बहुमंजिली भवनों को आग से सुरक्षा प्रदान करने के लिए 62 मीटर ऊंचाई के एक हाईड्रोलिक प्लेटफॉर्म सह टर्न टेबल एरीयल लैडर की खरीद के लिए 12 करोड़ 95 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। वहीं, पटना जिला के पुनपुन अंचल के डुमरी मौजा में 50 एकड़ जमीन पर राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेस यूनिवर्सिटी (NFSU) का बिहार कैंपस तैयार होगा। यहां केंद्रीय एफएसएल भी बनेगा। इसकी केंद्र सरकार से सहमति बन गई है। इसके लिए 287 करोड़ 16 लाख 95 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

कैबिनेट में लिए गए अन्य प्रमुख निर्णय
– मुंगेर जिला के तारापुर में सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटकीय सुविधाएं विकसित करने के लिए कृषि विभाग की 15 एकड़ एक डिसमिल जमीन को मुफ्त पर्यटन विभाग को ट्रांसफर किया जाएगा। बाद में इस क्षेत्र को तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र को स्थानांतरित किया जाएगा।
– सारण जिला स्थित सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर क्षेत्र को वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए 680 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
– सामूहिक दुर्घटना को राज्य की विशेष स्थानीय प्रकृति की आपदा में शामिल करते हुए इसमें मारे गए सभी व्यक्तियों के परिजनों या गंभीर रूप से घायलों को अनुग्रह अनुदान की राशि प्रदान की जाएगी। 2021 में इस योजना बंद कर दिया गया था। अब इसे फिर से शुरू किया जा रहा है।
– अब जल्द ही सभी विभागों से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए एक नंबर की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए सूचना प्रावैधिकी विभाग में सहयोग नाम से एक हेल्पलाइन शुरू की जा रही है। इस पर किसी भी विभाग से जुड़ी समस्या दर्ज करा सकते हैं।
– सोनपुर और अजगैबीनाथ धाम (भागलपुर) में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा विकसित करने के लिए डीपीआर तैयार किया जाएगा। इसके लिए निविदा के आधार पर चयनित एजेंसी को परामर्श शुल्क के तौर पर पांच करोड़ छह लाख रुपए की राशि प्रदान की जाएगी।

CM सम्राट के साथ दोनों डिप्टी CM व कई वरीय अधिकारी रहे शामिल
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह और प्रबंध निदेशक बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम नंदकिशोर सहित पर्यटन विभाग के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
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