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लोकतंत्र के लिए खतरा पारिवारिक पार्टियां वाले पीएम मोदी के बयान का सीएम नीतीश ने किया समर्थन

पटना : संविधान दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सियासत में बढ़ रहे परिवारवाद पर जमकर हमला बोला. संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने विभिन्न पार्टियों में बढ़ रहे परिवारवाद को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है. पीएम मोदी के इस बयान का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी समर्थन किया है.

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि ये बात बिल्कुल सही है कि पारिवारिक पार्टियां लोकतंत्र के लिए खतरा है. हमलोग शुरू से कह रहे हैं कि देश में पारिवारिक पार्टियों का कोई मतलब नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए राजद व लोजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को अपने परिवार को, बेटे, बेटियां को राजनीति में जगह दिलाते हैं, इसका कोई मतलब नहीं है. राजनीति में इसका कोई मतलब नहीं होना चाहिए. लेकिन आजकल कई दल इसी पर चल रहे हैं. अभी कुछ दिन इसी पर चल जाए, लेकिन आने वाले समय में ये पार्टियां नहीं चलेंगी.

वहीं नीति आयोग की रिपोर्ट पर सीएम नीतीश कुमार ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अभी हमने रिपोर्ट नहीं देखी है. देखने के बाद ही कुछ बताएंगे.

बता दें कि संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने विभिन्न पार्टियों में बढ़ रहे परिवारवाद को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी राजनीतिक दलों की तरफ देखिए, यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है, संविधान हमें जो कहता है उसके विपरीत है. उन्होंने कहा, भारत एक संवैधानिक लोकतांत्रिक परंपरा है और राजनीतिक दलों का अपना महत्व है, राजनीतिक दल भी हमारी संविधान की भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रमुख माध्यम है, लेकिन संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है, जब राजनीतिक दल अपने आप में अपना लोकतांत्रिक चरित्र खो देते हैं, जो दल खुद लोकतांत्रिक चरित्र खो चुके हैं वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, जब मैं कहता हूं कि पारिवारिक पार्टियां, इसका मतलब मैं ये नहीं कहता हूं कि एक परिवार से एक से अधिक लोग राजनीति में न आएं. योग्यता के आधार पर जनता के आशीर्वाद से किसी परिवार से एक से अधिक लोग राजनीतिक पार्टी में जाएं, इससे पार्टी राजनीतिक परिवार नहीं बनती, लेकिन जो पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार चलाता रहे, पार्टी की सारी व्यवस्था एक ही परिवार के पास रहे, वह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा संकट होता है.

रिपोर्ट : शक्ति

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