Naxal Encounter में शहीद के पैतृक गांव में दी गई अंतिम विदाई, उमड़ा लोगों का हुजूम

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औरंगाबाद: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद औरंगाबाद के जवान मदन सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार की शाम पैतृक गांव पहुंचा। शहीद जवान के शव का भारी संख्या में लोग बिहार झारखंड सीमा के सांडा मोड़ के समीप इंतजार कर रहे थे। पार्थिव शरीर के वहाँ पहुँचते ही भारत माता की जय, अमर शहीद अमर रहे के नारों से इलाका गूंज उठा। वहां से करीब 15 किलोमीटर तक शहीद का शव एक जुलूस की शक्ल में शहीद के पैतृक आवास पहुंचा। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी।

जानकारी के अनुसार मदन सिंह सड़सा गांव निवासी मानदेव सिंह के तीसरे नंबर के पुत्र थे, जिनकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी। गुरुवार की रात्रि में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। छत्तीसगढ़ में ही उनकी पोस्टिंग थी और ड्यूटी के दौरान आखिरी बार होली में वे अपने गांव आए थे। शहीद मदन सिंह की शादी वर्ष 2001 में संजू देवी से हुई थी जो उनके पैतृक गांव में ही रहती हैं, उनका एक बेटा और एक बेटी है। बेटी सिया नंदिनी बीए फाइनल ईयर की छात्रा है जबकि बेटा शिवम रांची में रहकर प्लस टू की पढ़ाई करता है। अपने पिता की शहादत की खबर सुनकर बच्चे भी स्तब्ध हैं।

अंतिम विदाई के लिए शहीद का पार्थिव शरीर श्मशान घाट जाने के दौरान, रिसियप, भरौधां, संडा, टिमल बिगहा सहित अन्य जगहों पर लोगों ने श्रद्धांजलि दी। इसी तरह तकरीबन रात्रि करीब 10 बजे बटाने नदी के घाट पर शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा जहां पुत्र शिवम कुमार ने मुखाग्नि दी। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश पासवान, लोजपा नेता सोनू सिंह, जिला परिषद प्रतिनिधि सुबोध कुमार, रिसियप मुखिया प्रतिनिधि टूटू यादव, भरौंधा मुखिया विजय कुमार सहित अन्य भी पहुंचे थे।

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औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट

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