रांची : झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सहायक अभियंता नियुक्ति मामले में
बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है.
अदालत 29 जून को अपना फैसला सुनाएगी.
प्रार्थी हंसराज और रविशंकर सिंह की ओर से कोर्ट में याचिका दाखिल कर
कहा गया है कि जेपीएससी ने नियमानुसार कुल पदों के ढाई गुना अभ्यर्थियों को
साक्षात्कार में नहीं बुलाया है. इस पर जेपीएससी का कहना है कि
दोनों पेपर में क्वालीफाई होने वाले अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार में बुलाया गया है.
इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. बता दें कि इसमें कुल 38 अभ्यर्थी थे.
इससे पहले सहायक अभियंता नियुक्ति के प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समय दिए जाने की मांग की गई. जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की. लेकिन आज की सुनवाई में अदालत ने फैसले को सुरक्षित रख लिया. वहीं जेपीएससी की ओर से संशोधित शपथ पत्र दाखिल किया गया है. इसमें कहा गया है कि पूर्व में दाखिल शपथ पत्र के पारा 21 में प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने की बात कहना गलत है. इसलिए इसमें सुधार किया गया है.
प्रारंभिक परीक्षा में नहीं मिला आरक्षण
जेपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण नहीं दिया है. पिछली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया गया कि सहायक अभियंता नियुक्ति मामले में पीटी (प्रारंभिक परीक्षा) का परिणाम नियमावली के अनुसार जारी किया गया है. वैसे अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें सामान्य श्रेणी से ज्यादा अंक मिले हैं. इसे आरक्षण नहीं माना जा सकता है. इस पर प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने विरोध करते हुए कहा कि यदि पीटी परीक्षा में किसी अभ्यर्थी को आरक्षित श्रेणी में रखा जाता है तो उसे ही आरक्षण देना कहते हैं.
पीटी परीक्षा में आरक्षण देने की नहीं है कोई नीति
बता दें इस संबंध में प्रार्थी भास्कर ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि सहायक अभियंता की नियुक्ति में कोटिवार परिणाम जारी किया गया है. वहीं, आरक्षित श्रेणी के कुछ अभ्यर्थियों को आरक्षण देते हुए सामान्य श्रेणी में रखा गया है. जबकि पीटी परीक्षा में आरक्षण देने की सरकार की कोई नीति नहीं है.
रिपोर्ट: प्रोजेश दास

















