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धनबाद: बीजेपी विधायक ढुल्लू महतो ने किया सरेंडर, गए जेल

बीजेपी विधायक- वारंटी राजेश गुप्ता को पुलिस हिरासत से छुड़ाकर ले जाने के मामले के नामजद आरोपी बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो ने सोमवार को अदालत में सरेंडर

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वारंटी को पुलिस हिरासत से छुड़ाने का है आरोप

धनबाद : बीजेपी विधायक- वारंटी राजेश गुप्ता को पुलिस हिरासत से छुड़ाकर ले जाने के मामले के नामजद आरोपी बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो ने सोमवार को अदालत में सरेंडर कर दिया. जिसके बाद धनबाद के अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अभिषेक श्रीवास्तव की अदालत ने विधायक ढुल्लू महतो को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. बता दें कि झारखंड उच्च न्यायालय ने ढुल्लू महतो की रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें एक माह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था.

बीजेपी विधायक ढुल्लू महतो समेत पांच लोगों पर आरोप

धनबाद के अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी शिखा अग्रवाल की अदालत ने 9 अक्टूबर 2019 को विधायक ढुल्लू महतो समेत कांड के नामजद पांच आरोपियों को वारंटी राजेश गुप्ता को पुलिस हिरासत से छुड़ाकर ले जाने का आरोप है. उनपर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप भी लगा है. उस समय डेढ़ वर्ष की साधारण कारावास एवं 9 हजार रुपए जुर्माना लगाया था. वहीं अदालत ने मामले के नामजद आरोपी बसंत शर्मा को बायइज्जत बरी कर दिया गया था.

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ढुल्लू महतो की अपील खारिज

आरोपियों ने 4 नवंबर 2019 को सेशन कोर्ट में कुल चार अपील दायर कर सजा के आदेश को चुनौती दी थी. सत्र न्यायालय ने विधायक समेत अन्य की अपील अगस्त 2022 को खारिज कर दी थी. ढुल्लू महतो पर सरकारी काम में बाधा डालने के साथ-साथ ऑन ड्यूटी एक इंस्पेक्टर की वर्दी फाड़ने और वारंटी को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने का आरोप है.

विधायक पर साल 2013 में धनबाद के कतरास थाने में यह मामला दर्ज किया गया था. हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए विधायक को सरेंडर करने का आदेश दिया था. वहीं कोर्ट ने लोअर कोर्ट से ढुल्लू महतो के खिलाफ दायर सभी मुकदमे का रिकॉर्ड मांगा हैं. इसी मामले में धनबाद अनुमंडल दंडाधिकारी शिखा अग्रवाल की कोर्ट ने साल 2019 में उन्हें डेढ़ साल की सजा भी सुनाई थी.

बीजेपी विधायक: उच्च न्यायालय ने दिया सरेंडर करने का आदेश

जिसे विधायक ढुल्लू महतो समेत अन्य झारखंड उच्च न्यायालय में रिवीजन याचिका दायर कर चुनौती दी थी परंतु रिवीजन करने से पहले विधायक ने निचली अदालत में सरेंडर नहीं किया था. लिहाजा उच्च न्यायालय ने उन्हें पहले सरेंडर करने का आदेश दिया था. ।

रिपोर्ट: मुन्ना

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