Dhanbad : धनबाद जिले के भीतर स्वास्थ्य विभाग में अजीब खेल चल रहा है। डायबिटीज और हाइपरटेंशन की लाखों रुपये की दवाएं खत्म होने के बाद भी विभाग को यह नहीं पता कि ये दवाएं किन मरीजों को दी गयी। अब स्वास्थ्य विभाग ने इसके जांच के निर्देश दिए हैं।
दवा किस मरीज को दी गई पता ही नहीं
बता दें कि डायबिटीज और हाइपरटेंशन की दवा को लेकर यह ताजा मामला सामने आया है। कुछ माह पहले जिले में मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए लाखों रुपये की लागत से दवाएं सिविल सर्जन कार्यालय में कार्यरत DPM नीरज कुमार यादव के माध्यम से मंगाई गई थीं। जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के मुताबिक मरीजों को दी जाने वाली ये दवाएं खत्म हो चुकी हैं। लेकिन किन मरीजों को यह दवा दी गई है, इसकी जानकारी विभाग के रिकॉर्ड में नहीं है।
ये भी पढ़ें- Big breaking : प्रदीप यादव बने कांग्रेस विधायक दल के नेता, राजेश कच्छप उप नेता…
जबकि नियम के मुताबिक किन मरीजों को यह दवा दी गई है, इसकी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी है। हाल ही में रांची में स्वास्थ्य मुख्यालय द्वारा आयोजित एक समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई है कि धनबाद जिला स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दवाएं खत्म हो रही हैं और विभाग के पास मरीजों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य मुख्यालय के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी गयी है।

जिला एनसीडी विभाग को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
जिला एनसीडी विभाग को यह पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि किन मरीजों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दवाएं दी गई हैं। स्वास्थ्य मुख्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिले की कुल आबादी के 24 प्रतिशत लोगों को उच्च रक्तचाप की दवा और 10 प्रतिशत आबादी को मधुमेह की दवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। हालांकि पूरे मामले में जब सिविल सर्जन धनबाद डॉ सी बी प्रतापन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई मामला है तो जांच करवाई जाएगी।
ये भी पढ़ें- Jamshedpur Crime : तारा कंस्ट्रक्शन में लूट मामले में 7 शातिर लूटेरे गिरफ्तार…
धनबाद में डीपीएम यानि जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीरज कुमार यादव की कारगुजारियों की वजह से सीएस कार्यालय पूर्व में भी सुर्खियां बटोरता रहा है। एक बार फिर से दवा खरीद और वितरण में घोटाले की बू आने लगी है। अब नए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को देखना है कि इस मामले में जांच कर उचित कार्रवाई होती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
धनबाद से राजकुमार जायसवाल की रिपोर्ट







