Dhanbad Royalty Rule: धनबाद में ठेकेदार राज्य सरकार के नए रॉयल्टी चालान सिस्टम के खिलाफ अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। हालांकि बिल्डिंग डिवीज़न द्वारा आयोजित टेंडर प्रक्रिया के लिए बड़ी संख्या में ठेकेदार पहुंचे, लेकिन विरोध स्वरूप किसी ने भी टेंडर डॉक्यूमेंट्स नहीं खरीदे। ठेकेदारों ने स्पष्ट किया कि जब तक नया सिस्टम वापस नहीं लिया जाता, वे किसी भी सरकारी विभाग की टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।
नई पॉलिसी पर आपत्तियां
ठेकेदारों का कहना है कि सरकार के नए सिस्टम के तहत, निर्माण कार्यों का भुगतान इस्तेमाल किए गए खनिजों के रॉयल्टी चालान जमा करने के बाद ही किया जाएगा। उनके अनुसार, यह नियम पुराने प्रोजेक्ट्स पर भी लागू किया जा रहा है—ऐसे प्रोजेक्ट्स जिनके लिए अब रॉयल्टी चालान प्राप्त करना संभव नहीं है। इससे कई लंबित बिलों के भुगतान पर भी असर पड़ रहा है।
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
ठेकेदारों ने गौण खनिजों (माइनर मिनरल्स) के उपयोग से संबंधित पिछली पॉलिसी को जारी रखने की मांग की है। उनका तर्क है कि नई व्यवस्था निर्माण कार्यों में अनावश्यक जटिलताएं पैदा करेगी और छोटे व मध्यम स्तर के ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान पहुंचाएगी।
टेंडर प्रक्रिया से स्वेच्छा से दूरी
ठेकेदारों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य दूसरों को बोली लगाने से रोकना नहीं है; बल्कि, उन्होंने स्वेच्छा से टेंडर प्रक्रिया में भाग न लेने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि इस विरोध का मकसद सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाना है और जब तक नई पॉलिसी रद्द नहीं की जाती, वे इस रुख पर कायम रहेंगे।
सरकार के फैसले पर सबकी नज़र
ठेकेदारों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है और पुरानी व्यवस्था बहाल करती है, तो वे टेंडर प्रक्रिया में फिर से भाग लेने पर विचार करेंगे। फिलहाल, निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों में नई रॉयल्टी चालान व्यवस्था को लेकर असंतोष बना हुआ है।
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