इन कारणों से बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, हर उम्र के लोग हो रहे शिकार, न करें नजरअंदाज

DESK: आज की तेज रफ्तार और तनावभरी जिंदगी ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। लगातार बढ़ता स्ट्रेस, अनियमित दिनचर्या और अनहेल्दी खानपान कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है, जिनमें ब्रेन स्ट्रोक एक बेहद खतरनाक समस्या बनकर उभरी है।

हर उम्र के लोग हो रहे शिकार

पहले जहां ब्रेन स्ट्रोक को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, वहीं अब यह हर उम्र और हर जेंडर के लोगों को प्रभावित कर रहा है। स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग में खून का बहाव अचानक कम हो जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी की कुछ आम लेकिन गंभीर गलतियां ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को तेजी से बढ़ा रही हैं।

स्मोकिंग और शराब का सेवन

तनाव कम करने या दोस्तों के दबाव में कम उम्र में ही स्मोकिंग और शराब की लत लगना आज आम बात हो गई है। सिगरेट का धुआं खून की नसों को कमजोर करता है और खून को गाढ़ा बनाता है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ता है। वहीं शराब ब्लड प्रेशर को बढ़ाकर शरीर को अंदर से कमजोर करती है। ये दोनों आदतें स्ट्रोक का बड़ा कारण बन सकती हैं।

बिजी लाइफस्टाइल बना रही है बीमार

आज की पीढ़ी में लगभग हर व्यक्ति कामकाजी है। समय की कमी के कारण लोगों की डाइट और लाइफस्टाइल दोनों ही बिगड़ चुकी हैं। देर से उठना, जल्दबाजी में तैयार होना, बिना नाश्ता किए ऑफिस निकलना, बाहर का जंक फूड खाना, देर तक ऑफिस में काम करना, रात को मोबाइल देखते हुए देर से सोना—यह सिलसिला रोज़ दोहराया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत लोग आज इसी अस्वस्थ जीवनशैली का पालन कर रहे हैं, जिससे स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

अनहेल्दी डाइट और एक्सरसाइज की कमी

बिजी लाइफस्टाइल के कारण लोग घर का बना खाना छोड़कर ऑयली, मसालेदार और फास्ट फूड पर निर्भर हो गए हैं। इन खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है, जिससे धमनियों में प्लाक जमने लगता है और खून का बहाव बाधित होता है। इसके अलावा नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि न करने से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।

हाई ब्लड प्रेशर: सबसे बड़ा कारण

NHS (UK) के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर कई गंभीर बीमारियों की जड़ है। यह खून की नसों को नुकसान पहुंचाता है और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। हाई बीपी से नसें सिकुड़ जाती हैं और कमजोर हो जाती हैं, जिससे इस्केमिक या हेमरेजिक स्ट्रोक हो सकता है। चूंकि हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित ब्लड प्रेशर जांच और ब्लड टेस्ट बेहद जरूरी हैं।

अत्यधिक तनाव भी है बड़ा खतरा

लगातार तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को प्रभावित करता है। जो लोग लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहते हैं, उनमें स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की शांति बेहद जरूरी है।

अन्य जोखिम कारक

स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने वाले अन्य कारणों में शामिल हैं—

  • बढ़ती उम्र
  • परिवार में स्ट्रोक या हृदय रोग का इतिहास
  • लंबे समय तक प्रदूषण में रहना
  • वायरल संक्रमण

इन सभी फैक्टर्स को नियंत्रित करना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

बचाव ही है सबसे बेहतर इलाज:

विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट और नशे से दूरी बनाकर स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित हेल्थ चेकअप भी बेहद जरूरी है।

 

 

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