पटना जिले में बच्चों की शिक्षा भगवान भरोसे, जिला स्थानांतरण के बाद भी शिक्षकों को प्रखंड आवंटन नहीं

पटना जिले में बच्चों की शिक्षा भगवान भरोसे, जिला स्थानांतरण के बाद भी शिक्षकों को प्रखंड आवंटन नहीं

पटना : विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षक आज सरकार और विभाग की लापरवाही तथा मनमानी का शिकार हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों के जिन शिक्षकों का जिलास्तर पर स्थानांतरण हुआ है, उन्हें अब तक प्रखंड और स्कूल का आवंटन नहीं मिल पाया है जबकि स्थानांतरण को छह महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। पटना जिले में ऐसे 1200 से अधिक शिक्षक हैं, जिनका तबादला पटना जिला में किया गया है।

छह महीने से प्रखंड/स्कूल आवंटन की आस लगाये है शिक्षक 

शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार जिला स्थानांतरण के बाद शिक्षकों को जल्द से जल्द प्रखंड और स्कूल आवंटित कर उसकी सूची ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड की जानी चाहिए, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। इस कारण कई शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं। इस मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि जिला स्थानांतरण वाले शिक्षकों के प्रखंड आवंटन का फैसला जिला पदाधिकारी स्तर की कमेटी द्वारा किया जाना है। कमेटी की बैठक के बाद ही अंतिम निर्णय होगा।

दिव्यांग शिक्षकों की सूची में गड़बड़ी का आरोप

शिक्षकों के द्वारा समाहरणालय स्तर स्थानांतरण सूची में घालमेल का भी आरोप लगाया जा रहा है। शिक्षको ने
जिला और प्रखंड स्थानांतरण से जुड़े दिव्यांग शिक्षकों की अनुशंसा सूची पर भी सवाल उठाया है। शिक्षकों की शिकायत है कि नियमों की अनदेखी की गई है। नियमानुसार 45 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरण मिलना चाहिए, लेकिन जांच में सामने आया है कि समाहरणालय स्तर पर की गई अनुशंसा में 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले करीब आधा दर्जन शिक्षकों के नाम शामिल कर लिए गए हैं। वहीं 45 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कुछ शिक्षकों के नाम के आगे ‘अनुशंसित नहीं’ लिखा गया है।

गौरतलब हो कि नीतीश सरकार ने अपने इस कार्यकाल में सात निश्चय पार्ट 3 को पूर्ण रूप से धरातल पर कार्यान्वित करने के लिये तत्पर है और शिक्षा में सुधार की बात तीसरे नंबर पर है लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण उठते ऐसे सवाल सरकार पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं।

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