रांची में गैस किल्लत और बढ़ती महंगाई का असर अब मटन बाजार पर भी दिखने लगा है। ग्राहकों की संख्या घटी और दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हुआ।
Gas Crisis रांची: रांची में इन दिनों मटन बाजार का दृश्य ऐसा लगने लगा है जैसे बकरों से ज्यादा मुश्किल में दुकानदार हों। गैस किल्लत और महंगाई ने ऐसा असर दिखाया है कि कसाईखानों से लेकर मीट भात की दुकानों तक सन्नाटा पसरा हुआ है। पहले जहां ग्राहकों की भीड़ रहती थी, वहीं अब दुकानदारों की नजरें रास्ते पर टिकी रहती हैं कि कोई ग्राहक आ जाए।
गैस संकट ने कसाइयों की मुस्कान छीनी
बरियातू और डिस्टिलरी पुल के सामने लगने वाली मटन दुकानों के दुकानदार बताते हैं कि असली संकट गैस सिलेंडर का है। पहले जो सिलेंडर करीब 910 रुपये में मिल जाता था, वही अब लगभग 970 रुपये तक पहुंच गया है। गैस महंगी हुई तो दुकानदारों का खर्च बढ़ गया। खर्च बढ़ा तो मटन की कीमत और कारोबार दोनों पर असर दिखने लगा।
Key Highlights
गैस किल्लत और महंगाई का असर रांची के मटन बाजार पर साफ दिखने लगा
पहले दर्जनों बकरों का मटन बिकता था, अब दो तीन बकरों तक सिमटी बिक्री
गैस सिलेंडर की कीमत 910 रुपये से बढ़कर करीब 970 रुपये तक पहुंची
ग्राहकों की संख्या घटने से दुकानदारों के कारोबार पर पड़ा असर
शहर की कई मीट भात दुकानों में मटन की सप्लाई भी हुई कम
Gas Crisis: दर्जनों बकरों से दो तीन बकरों तक सिमटी बिक्री
दुकानदार बताते हैं कि पहले एक दिन में दर्जनों बकरों का मटन बिक जाया करता था। सप्ताहांत के दिनों में तो दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी। लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि पूरे दिन में मुश्किल से दो या तीन बकरों का ही मटन बिक पाता है। कई बार तो शाम तक दुकानदार ग्राहक का इंतजार करते रह जाते हैं।
Gas Crisis: मीट भात दुकानों तक कम पहुंच रहा मटन
एक सप्ताह पहले तक शहर की कई मीट भात दुकानों में रोजाना मटन की सप्लाई होती थी। लेकिन गैस किल्लत के बाद मटन की मांग घट गई है। नतीजा यह हुआ कि अब पहले की तुलना में बहुत कम दुकानों तक ही मटन पहुंच पा रहा है।
कुल मिलाकर रांची का मटन बाजार इन दिनों अजीब दौर से गुजर रहा है। बकरे शायद राहत की सांस ले रहे होंगे, लेकिन कसाइयों की चिंता बढ़ गई है। और आम आदमी? वह मटन की दुकान के सामने से गुजरते हुए बस यही सोच रहा है कि कभी यह स्वाद जेब पर इतना भारी नहीं पड़ा था।
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