भागलपुर : पेट की आग और परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जब जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत बन जाए, तो इंसान मौत से भी टकराने को मजबूर हो जाता है। ऐसी ही खौफनाक तस्वीर भागलपुर में गंगा नदी के ऊपर बने विक्रमशीला सेतु से सामने आई है, जहां दियारा इलाके में खेती करने वाले एक दर्जन से अधिक गांवों के किसान रोज अपनी जान हथेली पर रखकर 40 फीट ऊंचे पुल से रस्सी के सहारे नीचे उतरते हैं।
ये कोई स्टंट नहीं बल्कि रोजमर्रा की मजबूरी है
आपको बता दें कि ये कोई स्टंट नहीं बल्कि रोजमर्रा की मजबूरी है। पुल के ऊपर से नीचे खेतों तक पहुंचने के लिए किसान मोटी रस्सी में गांठ बांधते हैं और उसी के सहारे नीचे उतरते हैं। दुग्ध उत्पादक किसान दूध के डब्बों को भी रस्सी से ऊपर खींचते हैं। लेकिन इस बीच जरा सी चूक और सीधा मौत से सामना हो सकता है।

कल इसी खतरनाक रास्ते ने इस्माइलपुर के किसान रंजीत यादव की जान ले ली
कल इसी खतरनाक रास्ते ने इस्माइलपुर के किसान रंजीत यादव की जान ले ली। रस्सी के सहारे नीचे उतरते वक्त उनका हाथ फिसल गया और वे सीधे नीचे जा गिरे। गंभीर रूप से घायल रंजीत यादव को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस दर्दनाक हादसे के बाद भी किसान उसी तरह रस्सी के सहारे उतरने को मजबूर हैं। उनका साफ कहना है ये हमारी मजबूरी है। सभी के पास नाव नहीं है, और रोज नाव से आना-जाना करना हमारे बस में नहीं।

करीब 40 फीट की ऊंचाई, नीचे खेत और बीच में सिर्फ एक रस्सी
करीब 40 फीट की ऊंचाई, नीचे खेत और बीच में सिर्फ एक रस्सी। ये तस्वीरें सिर्फ डराती नहीं बल्कि सिस्टम से सवाल भी करती हैं। आखिर कब तक किसान यूं ही जान जोखिम में डालकर खेती करेंगे? क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेगा या अगली किसी अनहोनी का इंतजार करेगा? विक्रमशीला सेतु की ये तस्वीरें सिर्फ खबर नहीं, बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल हैं।

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राजीव रंजन की रिपोर्ट
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