GI Tag Jharkhand: झारखंड के 28 उत्पादों को GI Tag दिलाने की तैयारी, देवघर का अड्डे मटन भी शामिल

GI Tag Jharkhand:सोहराई पेंटिंग के बाद झारखंड के 28 उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू. देवघर का प्रसिद्ध अड्डे मटन भी सूची में शामिल.


GI Tag Jharkhand:अड्डे मटन को जीआइ टैग दिलाने की प्रक्रिया तेज

GI Tag Jharkhand रांची: झारखंड में सोहराई पेंटिंग के बाद अब 28 अन्य पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने की तैयारी शुरू हो गयी है. इस दिशा में झारखंड सरकार के साथ राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड ने पहल की है. देवघर का प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन अड्डे मटन भी इस सूची में शामिल कर लिया गया है. इसे देवघर अड्डे एसोसिएशन की ओर से नामांकित किया गया है.

पीढ़ियों से चली आ रही इस खास रेसिपी को जनवरी महीने में आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध किया गया. इसके लिए चेन्नई से आयी एक विशेषज्ञ टीम ने झारखंड का दौरा कर एनएलयू रांची में इसकी प्रस्तुति भी देखी. प्रारंभिक तौर पर यह व्यंजन चार महीने के मूल्यांकन दौर में रहेगा. यदि इस अवधि में किसी अन्य परिवार या समूह की ओर से मूल रेसिपी को लेकर कोई आपत्ति नहीं आयी, तो अड्डे मटन को झारखंड का विशिष्ट उत्पाद मानते हुए जीआइ टैग मिल जायेगा.


Key Highlights

  • झारखंड के 28 उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू

  • देवघर का प्रसिद्ध अड्डे मटन सूची में शामिल

  • चार महीने तक चलेगा रेसिपी और मौलिकता का मूल्यांकन

  • अट्टे नाम मिट्टी के पारंपरिक बर्तन से जुड़ा

  • जीआइ टैग से उत्पादों को पहचान और बाजार में सुरक्षा


GI Tag Jharkhand:मिट्टी के अट्टे से जुड़ी है इस व्यंजन की पहचान

देवघर में जिस पारंपरिक मिट्टी के बर्तन में तय मात्रा में मटन परोसा जाता है, उसे अट्टे कहा जाता है. इसी परंपरा से इस व्यंजन का नाम अड्डे मटन पड़ा, जो आज बाबा नगरी की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. इस व्यंजन की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि कई राष्ट्रीय स्तर की हस्तियों ने भी इसके स्वाद की प्रशंसा की है.

फिलहाल झारखंड राज्य में केवल सोहराई पेंटिंग को ही जीआइ टैग प्राप्त है, जो 14 सितंबर 2021 को मिला था. इसे ट्राइफेड की ओर से नामांकित किया गया था और यह टैग दस वर्षों के लिए मान्य है. अब अड्डे मटन समेत 28 अन्य उत्पादों को भी इसी तरह की पहचान दिलाने की तैयारी चल रही है.

असली अड्डे मटन की पहचान और परंपरा

अड्डे मटन के जनक माने जाने वाले बुद्धिनाथ मिश्र उर्फ बुद्धन बाबा बताते हैं कि असली अड्डे मटन में न तो प्याज डाला जाता है और न ही लहसुन. बाहर बिकने वाले कई व्यंजनों में इनकी गंध आने लगी है, जो इसकी मूल पहचान से अलग है. वे बताते हैं कि पहले एक दिन में सात से आठ क्विंटल अड्डे मटन तैयार किया जाता था, लेकिन अब प्रतिदिन दो से तीन क्विंटल ही बन पाता है.

नाबार्ड की सीजीएम दीपमाला घोष के अनुसार जीआइ टैग किसी उत्पाद की मौलिकता और क्षेत्रीय पहचान को सुरक्षित करने का माध्यम है. इससे स्थानीय उत्पादकों को बेहतर दाम, पहचान और आजीविका की सुरक्षा मिलेगी. केंद्रीय मंत्रालय की ओर से जांच और मंजूरी के बाद इन उत्पादों को आधिकारिक जीआइ टैग प्रदान किया जायेगा.

Saffrn

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