पटना : शहद उत्पादक किसानों को आर्थिक मजबूती देने के लिए बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है। किसानों को उनके द्वारा उत्पादित शहद का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो सके इसके लिए सहकारिता विभाग ने 144 प्रखंड स्तरीय शहद उत्पादक एवं प्रसंस्करण समितियों का गठन किया है। ये समितियां किसानों को संगठित रूप से उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सहायता प्रदान करेगी।
विभाग के प्रयास से राज्य स्तर पर बिहार राज्य शहद उत्पादक व प्रसंस्करण फेडरेशन का भी गठन हो चुका है
विभाग के प्रयास से राज्य स्तर पर बिहार राज्य शहद उत्पादक एवं प्रसंस्करण फेडरेशन का भी गठन हो चुका है। यह फेडरेशन प्रखंड स्तरीय समितियों को एक मंच प्रदान करेगा, जिससे शहद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, ब्रांडिंग, बड़े बाजारों तक पहुंच और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कृषि विभाग, उद्योग विभाग और कॉम्फेड (सुधा) के बीच शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समेकित प्रयास करने पर सहमति बनी है। इससे किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, बेहतर उपकरण और बाजार लिंकेज मिलेगा।
विशेष है बिहार का शहद
मुजफ्फरपुर, वैशाली और समस्तीपुर लीची के अपने बड़े-बड़े बागों के लिए जाने जाते हैं। लीची का शहद बिहार के सबसे लोकप्रिय शहद में से एक है और अपने अनोखे स्वाद के लिए इसकी बहुत मांग है। सरसों का शहद व्यापक रूप से सरसों की खेती वाले क्षेत्रों जैसे नालंदा और पटना में उत्पादित किया जाता है, इसी तरह औरंगाबाद और रोहतास में तिल का शहद भी उत्पादित किया जाता है।
बिहार में लीची, सरसों, तिल व सूरजमुखी जैसी फसलों की वजह से शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं
बिहार में लीची, सरसों, तिल और सूरजमुखी जैसी फसलों की वजह से शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार के प्रयास से बिहार शहद उत्पादन में निरंतर आगे बढ़ रहा है, देश में यह शहद उत्पादन में चौथे स्थान पर है। राज्य सरकार सहकारिता मॉडल के जरिए किसानों की मध्यस्थों पर निर्भरता कम करना चाहती है। सरकार की कोशिश है कि किसानों की पहुंच उपभोक्ताओं या बड़े खरीदारों तक हो ताकि उनकी आय में वृद्धि हो।
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