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JTET Language Policy: जेटेट में जिलावार भाषा निर्धारण पर बनी कमेटी, जनजातीय भाषाओं के छात्रों का आंकड़ा चिंताजनक

 झारखंड में जेटेट की जिलावार भाषा व्यवस्था को लेकर कमेटी बनी। मैट्रिक में केवल 12 प्रतिशत विद्यार्थी ही जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं पढ़ रहे हैं।


JTET Language Policy रांची : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट में जिलावार भाषा निर्धारण को लेकर राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। कमेटी ने शिक्षा विभाग से जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं पढ़ने वाले विद्यार्थियों का विस्तृत डाटा मांगा है। इस बीच सामने आये आंकड़ों ने राज्य में जनजातीय भाषाओं की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

राज्य में हर वर्ष मैट्रिक परीक्षा में शामिल होने वाले कुल विद्यार्थियों में केवल 10 से 12 प्रतिशत छात्र ही जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन भाषाओं को पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कोई बड़ी वृद्धि भी दर्ज नहीं की गयी है।

JTET Language Policy: मैट्रिक में संताली पढ़ने वाले सबसे अधिक विद्यार्थी

वर्ष 2026 की मैट्रिक परीक्षा में कुल 4.22 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 51,845 विद्यार्थियों ने अलग-अलग जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की परीक्षा दी थी। सबसे अधिक 18,172 विद्यार्थी संताली भाषा के रहे।

पिछले चार वर्षों में संताली भाषा पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगभग छह हजार की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022 में यह संख्या करीब 12 हजार थी।

क्षेत्रीय भाषाओं में खोरठा पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 10,176 रही, जबकि नागपुरी में 5,522 और बांग्ला में 4,990 विद्यार्थी शामिल हुए।


Key Highlights

  • जेटेट में जिलावार भाषा निर्धारण को लेकर बनी उच्चस्तरीय कमेटी

  • मैट्रिक में केवल 10 से 12 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ रहे जनजातीय भाषाएं

  • संताली भाषा पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक

  • खड़िया भाषा पढ़ने वाले मात्र 38 विद्यार्थी

  • सरकार ने जनजातीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए शुरू किये कई प्रयास


JTET Language Policy: कुछ भाषाओं की स्थिति बेहद कमजोर

राज्य में कुछ जनजातीय भाषाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में खड़िया भाषा पढ़ने वाले मात्र 38 विद्यार्थी रहे, जबकि हो भाषा में 130 और ओड़िया में केवल 207 परीक्षार्थी शामिल हुए।

इसके अलावा कुरमाली में 3,439, मुंडारी में 3,221, उरांव में 3,831 और पंचपरगनिया में 2,109 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।

JTET Language Policy: सरकार ने शुरू किये कई प्रयास

विद्यार्थियों की घटती संख्या को देखते हुए सरकार ने जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्राथमिक विद्यालयों में जनजातीय भाषाओं में पढ़ाई शुरू की गयी है।

साथ ही प्लस टू विद्यालयों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा शिक्षकों के पद भी सृजित किये गये हैं। हालांकि अभी भी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में इन भाषाओं की समुचित व्यवस्था नहीं है। हाइस्कूल स्तर पर शिक्षकों की कमी बनी हुई है और प्लस टू स्तर पर कई विषयों की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है।

JTET Language Policy: मुख्यधारा की भाषाओं की ओर बढ़ रहा रुझान

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर अभिभावक हिंदी और अंग्रेजी को रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाज से अधिक उपयोगी मानते हैं। इसी कारण विद्यार्थी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की बजाय मुख्यधारा की भाषाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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