High Court strict on JPSC JET 2024:  1.75 लाख आवेदन के बावजूद Exam में देरी पर सवाल

High Court strict on JPSC JET 2024:  झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC से JET 2024 परीक्षा की तिथि और तैयारियों पर जवाब मांगा। 1.75 लाख आवेदन के बाद भी परीक्षा नहीं होने पर नाराजगी।


High Court strict on JPSC JET 2024 रांची: झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट 2024 को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। परीक्षा में हो रही देरी पर कोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा है। 1.75 लाख अभ्यर्थियों के आवेदन के बावजूद परीक्षा आयोजित नहीं होने पर अदालत ने आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

High Court strict on JPSC JET 2024: JET 2024 में देरी पर कोर्ट की नाराजगी

झारखंड हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट की तिथि क्या तय की गई है और इसके आयोजन को लेकर अब तक क्या तैयारी की गई है।

अदालत को बताया गया कि परीक्षा मार्च में संभावित है। इस पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि दिसंबर 2025 में आवेदन प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। इसके बाद भी करीब ढाई महीने बीत जाने पर परीक्षा नहीं कराना आयोग की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतने बड़े पैमाने पर आवेदन लेने के बाद परीक्षा टालना उचित नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को निर्धारित की गई है।


Key Highlights

  • JET 2024 परीक्षा में देरी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

  • 1.75 लाख अभ्यर्थियों के आवेदन के बावजूद परीक्षा नहीं

  • मार्च में संभावित परीक्षा तिथि पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

  • 14वीं JPSC में 22 अभ्यर्थियों को आवेदन की अनुमति

  • रांची विश्वविद्यालय में नियुक्ति लंबित रहने पर सवाल


High Court strict on JPSC JET 2024: 14वीं JPSC परीक्षा में 22 अभ्यर्थियों को राहत

झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं नियुक्ति परीक्षा से जुड़े मामले में भी हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने उम्र सीमा में छूट की मांग करने वाले 22 अभ्यर्थियों का आवेदन 14 फरवरी तक स्वीकार करने का निर्देश दिया है।

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों का अंतिम परिणाम न्यायालय के आदेश से प्रभावित होगा। बिना अदालत की अनुमति के इनका रिजल्ट जारी नहीं किया जाएगा।

High Court strict on JPSC JET 2024: असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान रांची विश्वविद्यालय में लंबे समय से असिस्टेंट प्रोफेसर और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा भी उठा। याचिकाकर्ता अनिकेत ओहदार की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि नियमित नियुक्ति न होने के कारण विश्वविद्यालय में कॉन्ट्रैक्ट और घंटी आधारित शिक्षकों के सहारे शैक्षणिक कार्य चलाया जा रहा है।

रांची विश्वविद्यालय में लंबित नियुक्तियों का सीधा असर शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। अदालत ने इस पर भी गंभीरता से विचार करने का संकेत दिया है।

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