लखनऊ । CM Yogi : महाकुंभ में गिद्धों को लाशें नजर आती हैं, सनातन की सुंदरता नहीं…। सोमवार को यूपी विधानसभा में बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चली चर्चा का जवाब देने के क्रम में CM Yogi आदित्यनाथ ने महाकुंभ को लेकर दागे गए सवालों एवं किए गए आक्षेपों पर करारा पलटवार किया।
CM Yogi ने प्रतिपक्षी नेताओं की जमकर चुटकियां भी लीं लेकिन महाकुंभ को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर हमला बोला।
CM Yogi ने कहा कि – ‘…समाजवादियों और वामपंथियों को सनातन की सुंदरता रास नहीं आ रही है। …महाकुंभ में जिसने जो तलाशा उसे वो मिला। …गिद्घों को केवल लाश मिली। सुअरों को गंदगी मिली। संवेदनशील लोगों को रिश्तों की खूबसूरत तस्वीर मिली।
….आस्थावानों को पुण्य मिला। …गरीबों को रोजगार मिला। ,,,अमीरों को धंधा मिला। …श्रद्घालुओं को साफसुथरी व्यवस्था मिली। …पर्यटकों को अव्यवस्था मिली। …सद्भावना वाले लोगों को जातिरहित व्यवस्था मिली।
….एक ही स्थान पर सभी जाति के लोगों ने स्नान किया। …लेकिन महाकुंभ को लेकर किए जाने वाले प्रश्न समाजवादियों और वामपंथियों की नीयत को दर्शाते हैं।’
‘महाकुंभ में 26 तक संख्या 65 करोड़ होगी…’
CM Yogi ने आगे कहा कि – ‘…जनसंख्या को देखें तो 144 करोड़ का भारत है। इसमें सनातन धर्मावलंबियों की संख्या 110 करोड़ है। …महाकुंभ में अगर विश्व स्तरीय सुविधा का ही परिणाम है कि अब तक 63 करोड़ श्रद्धालु उस आयोजन का हिस्सा बन चुके हैं।
…अभी 2 दिन के बाद महाशिवरात्रि आएगी। आज 24 है…कल 25…और परसों 26। …26 फरवरी तक मेरा अनुमान है कि जिस प्रकार से देश और दुनिया महाकुंभ के प्रति आकर्षित है… यह 65 करोड़ की संख्या पार होगी।
…लेकिन नेता प्रतिपक्ष को इस बात पर आपत्ति थी कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने लोककल्याण संकल्प पत्र में – राज्यपालजी के अभिभाषण में महाकुंभ को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए क्यों उल्लेख किया और उस प्रकार की व्यवस्थाएं क्यों नहीं कीं?’

CM Yogi बोले – समाजवादी से सनातनी हुए नेता प्रतिपक्ष
अपने संबोधन में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद की चुटकी लेते हुए CM Yogi आदित्यनाथ ने कहा कि – ‘…नेता प्रतिपक्ष समेत 146 माननीय सदस्यों से चर्चा में भाग लिया है। सत्ता पक्ष के 98 और प्रतिपक्ष के 48 सदस्यों ने भाग लिया।
…नेता प्रतिपक्ष की बातों को ध्यान से सुन रहा था। उन्होंने काफी सारी बातें कहीं…कई मुद्दे उठाए। मुझे अच्छा लगा…कि नेता प्रतिपक्ष समाजवादी से सनातनी हो गए हैं।
…और उन्होंने अपने सदस्यों को अपने स्वभाव के विपरीत जाकर टोका भी कि तुम क्या समझते हो सनातन के बारे में …तुम नहीं समझ पाओगे…यानि उनकी बुद्धि से परे का यह विषय है। …लेकिन ये स्वागत योग्य है कि इस विषय को आपने समझा है।
…इस विषय को महत्व देकर के उसके प्रति सम्मान का भाव भी व्यक्त किया है। …मैं भौंचक्क हूं। 2013 में आपको वहां जाने नहीं दिया गया था। इस बार आप गए थे। आपने स्नान भी किया। आपने उसकी सराहना भी की।
…और वहां की व्यवस्थाओं के बारे में मुक्त कंठ से प्रशंसा की। व्यवस्था सरकार की थी, माध्यम अध्यक्ष जी थे। लेकिन गए और जाकर के आपने मुक्त कंठ उन व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।
…नेता प्रतिपक्ष ने महाकुंभ पर बहुत सारी बातें कहीं। अयोध्या के बारे में उन्होंने बहुत बड़ी चर्चा की। अच्छा लगा मुझे कि आपने इसको स्वीकार किया। महाकुंभ को स्वीकार किया, सनातन परंपरा को भी स्वीकार किया और अयोध्याधाम को भी स्वीकार किया।’

CM Yogi : समाजवादियों का आचरण संवैधानिक तो अंसवैधानिक क्या ?
इसी क्रम में CM Yogi आदित्यनाथ ने कहा कि – ‘…लेकिन महोदय मैं अपनी शुरू करना चाहूंगा उन बातों को लेकर जिन्हें महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान देखा था। जो दृश्य सदन में देखने को मिला…आप संविधान की प्रति तो लेकर घूमते हैं लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे हुए महानुभावों के प्रति आपलोगों का दृष्टिकोण क्या है ?
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान के दृश्य को देखकर के सहज अनुमान लगा सकते हैं। जो शोरशराबा किया गया, जिस प्रकार की टिप्पणियां की गईं…जिस प्रकार का राज्यपाल के प्रति व्यवहार किया जा रहा था, क्या वो संवैधानिक था?
…और उस प्रकार का व्यवहार आपका अगर संवैधानिक है तो फिर असंवैधानिक क्या है?
…आपलोग भाषण बहुत देते हैं लेकिन आपलोगों को जो वास्तविक आचरण है उसे देखना हो तो समाजवादी पार्टी जो सोशल मीडिया हैंडल है उसमें समाजवादी पार्टी की विचारधारा, उनके आंतरिक शिष्टाचार, लोकतंत्र के प्रति उनके विचारों की अभिव्यक्ति का ऐसा माध्यम है जिससे कोई भी स्वस्थ समाज स्वयं में लज्जा महसूस करता है।
…और दूसरों को आप उपदेश देते हैं। यह काफी महत्वपूर्ण है। मुद्दे अनेक हो सकते हैं… विचारधारा अपने हो सकते हैं लेकिन अपनी सोच के आधार पर विचारों को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता हमारा संविधान हमें देता है। इसके तहत माननीय सदस्यगण अपनी बातों को रखते हैं।
…और आपने कहा कि आप बुद्ध को नहीं मानते। मैं तो भारत के अंदर हर महापुरुष को सम्मान देता हूं जिसने भारत के अंदर जन्म लिया है। मैं बुद्ध को भी मानता हूं…जैन को भी मानता हूं…महावीर जैन तक की परंपरा के सभी तीर्थंकरों के प्रति भी सम्मान का भाव रखता हूं।
…हम सनातन के साथ-साथ बौद्ध तीर्थस्थलों का भी पुनरुद्धार एवं सुंदरीकरण का कार्य भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रहे हैं। ये डबल इंजन की ही सरकार है कि 26 दिसंबर की तिथि वीर बाल दिवस के रूप में गुरू गोविंद सिंह के चार -चार बाल शहीदों के याद में प्रधानमंत्री जी ने घोषित किया है।
…यह पहली बार है कि गुरबानी का पाठ मुख्यमंत्री आवास पर निरंतर हो रहा है।’


















