रांची: झारखंड में भाषा विवाद को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। हाल ही में जेटेट परीक्षा और स्थानीय भाषाओं के चयन को लेकर उठे बवाल के बीच जयराम महतो ने सीधा हमला बोला है – न सिर्फ सरकार पर बल्कि अमित मंडल जैसे विपक्षी नेताओं पर भी। उन्होंने कहा कि “जो लोग पर्दे के पीछे से नीति नियम बना रहे हैं, वे इस राज्य के नहीं हैं और न ही इस राज्य की परंपराओं, समाज, भूगोल और भाषाई भावनाओं की कोई समझ रखते हैं।”
जयराम महतो ने बिना लाग-लपेट के कहा कि अधिकतर आईएएस अधिकारी बिहार और उत्तर प्रदेश से आते हैं, जो यहां की सामाजिक संरचना से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। उन्होंने सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
अमित मंडल के आरोपों पर करारा जवाब
अमित मंडल द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए महतो ने कहा, “अगर हम जेएमएम की बी टीम होते, तो सरकार की खुलकर आलोचना नहीं कर रहे होते। बल्कि आज हम उसी सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हम जनता के मुद्दों के साथ खड़े हैं।” उन्होंने विपक्षी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि वे केवल तब सामने आते हैं जब हिंदू-मुस्लिम या इंडिया-पाकिस्तान जैसे मुद्दे उठते हैं, लेकिन राज्य के जलते सवालों पर मौन साध लेते हैं।
कुरमाली भाषा का समर्थन और आंदोलन की चेतावनी
कुरमाली भाषा को गोड्डा से हटाए जाने के सवाल पर जयराम महतो ने दो टूक कहा कि “निस्संदेह गोड्डा में कुरमाली भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए। वहां की बड़ी आबादी इस भाषा को बोलती है और आंदोलन की ज़रूरत पड़ी तो वहां भी आवाज़ बुलंद की जाएगी।”
सरकार के दोहरे रवैये पर निशाना
महतो ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह दिखावे के लिए फीडबैक की बात करती है, लेकिन असल में पहले से तय योजनाओं को लागू कर रही है। उन्होंने सिरम टोली का उदाहरण देते हुए कहा कि लाखों विरोध के बावजूद सरकार ने उसे चालू कर दिया, जो यह दर्शाता है कि आदिवासी मान्यताओं और जनभावनाओं को दरकिनार किया जा रहा है।


















