Jharkhand High Court Verdict: धनबाद जमीन रजिस्ट्री मामले में 4 Sub Registrar को राहत, विभागीय कार्रवाई रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद जमीन रजिस्ट्री गड़बड़ी मामले में चार पूर्व सब रजिस्ट्रारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई रद्द कर दी। कोर्ट ने निबंधन पदाधिकारी की जिम्मेदारियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।


Jharkhand High Court Verdict रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद में जमीन निबंधन में हुई गड़बड़ियों से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए धनबाद के तत्कालीन चार सब रजिस्ट्रारों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सब रजिस्ट्रार संतोष कुमार, सुजीत कुमार, मिहिर कुमार और श्वेता कुमारी के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को रद्द कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी जमीन का वास्तविक मालिक कौन है, खाता और प्लॉट का रिकॉर्ड सही है या नहीं तथा पुराने और नए सर्वे रिकॉर्ड का मिलान करना निबंधन पदाधिकारी की वैधानिक जिम्मेदारी नहीं है। इसलिए केवल इन आधारों पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

Jharkhand High Court Verdict:भ्रष्टाचार या मिलीभगत का कोई आरोप नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि चारों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, मिलीभगत, दुर्भावना, किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने या व्यक्तिगत लाभ लेने का कोई आरोप नहीं है। विभाग की ओर से केवल यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों का इस प्रकार का सत्यापन करना कानून के तहत सब रजिस्ट्रार की अनिवार्य जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में विभागीय कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं बनता।


Key Highlights:

  • झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के चार तत्कालीन सब रजिस्ट्रारों को बड़ी राहत दी।

  • विभागीय कार्रवाई रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा, खाता-प्लॉट सत्यापन निबंधन पदाधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी नहीं।

  • भ्रष्टाचार, मिलीभगत या निजी लाभ का कोई आरोप साबित नहीं हुआ।

  • डिजिटल रिकॉर्ड में गड़बड़ी से 150 से अधिक जमीन की रजिस्ट्रियां प्रभावित हुई थीं।

  • कोर्ट के फैसले से निबंधन अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारियों पर महत्वपूर्ण स्पष्टता आई।


Jharkhand High Court Verdict:डिजिटल रिकॉर्ड की गड़बड़ी से बढ़ी थी समस्या

मामले में सामने आया कि धनबाद के कई मौजा की जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड में खाता और प्लॉट नंबर बदल गए थे। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण 150 से अधिक रजिस्ट्री गलत खाता-प्लॉट के आधार पर हो गईं। इसके बाद अंचल कार्यालयों में म्यूटेशन भी उन्हीं गलत रिकॉर्ड के आधार पर कर दिया गया।

हालांकि, अब तक ऑनलाइन रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार नहीं किया गया है, जिससे प्रभावित लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं।

Jharkhand High Court Verdict:फैसले का क्या होगा असर

हाईकोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि डिजिटल रिकॉर्ड की त्रुटियों के लिए केवल निबंधन पदाधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जब तक उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, मिलीभगत या जानबूझकर नियमों के उल्लंघन का कोई ठोस प्रमाण न हो।

इस निर्णय को जमीन निबंधन से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है, क्योंकि इससे सब रजिस्ट्रारों की वैधानिक जिम्मेदारियों की सीमा भी स्पष्ट हुई है।

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