JSSC उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में रांची पुलिस ने 2400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। 179 आरोपी नामजद, जांच में फर्जी प्रश्नपत्र और अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा।
JSSC Excise Constable Paper Leak रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा अप्रैल 2026 में आयोजित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में रांची पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए कोर्ट में 2400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। तमाड़ थाना कांड संख्या 21/2026 से जुड़े इस मामले में पुलिस ने अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर 179 आरोपियों को नामजद किया है।
इस मामले में रांची पुलिस अब तक 169 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें 159 अभ्यर्थी भी शामिल थे। हालांकि, सभी अभ्यर्थियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है।
JSSC Excise Constable Paper Leak:जांच में बड़ा खुलासा, असली पेपर लीक नहीं हुआ था
चार्जशीट में पुलिस ने खुलासा किया है कि सिंडिकेट के पास परीक्षा का असली प्रश्नपत्र नहीं पहुंचा था। आरोपियों ने पिछले 10 वर्षों की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण कर अनुमान के आधार पर एक फर्जी प्रश्नपत्र तैयार किया। इसके बाद परीक्षा संचालन एजेंसी से पेपर लीक होने की अफवाह फैलाकर बेरोजगार युवाओं को झांसे में लिया गया और उनसे मोटी रकम वसूली गई।
जांच के अनुसार, पूरे मामले में पेपर लीक का भ्रम पैदा कर अभ्यर्थियों को गुमराह किया गया और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की साजिश रची गई।
Key Highlights:
JSSC उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में 2400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल।
चार्जशीट में 179 आरोपियों को नामजद किया गया, 169 गिरफ्तार हुए थे।
जांच में खुलासा, असली प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था, फर्जी सेट बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी की गई।
पुलिस के अनुसार पिछले 10 वर्षों के प्रश्नपत्रों से तैयार किया गया था फर्जी पेपर।
चार्जशीट में सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और एजेंटों की भूमिकाओं का भी विस्तृत उल्लेख।
JSSC Excise Constable Paper Leak:चार्जशीट में मास्टरमाइंड और एजेंटों की भूमिका का खुलासा
चार्जशीट में कई प्रमुख आरोपियों की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
बिहार के पटना निवासी विकास कुमार पर आरोप है कि परीक्षा से एक रात पहले छात्रों को कथित उत्तर रटवाने की जिम्मेदारी उसी के पास थी। उसने पूछताछ में बताया कि सहयोगी चुनचुन कुमार के माध्यम से उसे व्हाट्सएप पर कथित प्रश्नपत्र और उत्तर मिले थे। वह अन्य साथियों के साथ 11 अप्रैल की रात छात्रों को उत्तर याद करा रहा था।
रामगढ़ के मांडू निवासी आशीष कुमार को गिरोह का प्रमुख एजेंट बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी का झांसा दिया, उनके एडमिट कार्ड व्हाट्सएप के जरिए सिंडिकेट तक पहुंचाए और अपनी कार का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को लाने-ले जाने में किया।
मुख्य आरोपी अतुल वत्स पर व्हाट्सएप के माध्यम से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को कथित लीक प्रश्नपत्र का लालच देकर फंसाने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि वह पहले जयपुर के पेपर लीक मामले और झारखंड सीजीएल परीक्षा 2024 से जुड़े मामले में भी आरोपी रह चुका है।
JSSC Excise Constable Paper Leak:रांची में ठहरने और साक्ष्य मिटाने की जिम्मेदारी भी तय
चार्जशीट के अनुसार बिहार के पूर्वी चंपारण निवासी मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह ने रांची में गिरोह के सदस्य क्रिस्टोफर के ठहरने और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली थी। पुलिस का आरोप है कि उसने जांच से बचने के लिए क्रिस्टोफर का मोबाइल नंबर डिलीट किया और नया मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की भी कोशिश की।
रांची पुलिस का कहना है कि चार्जशीट में डिजिटल साक्ष्य, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल, दस्तावेज और अन्य तकनीकी प्रमाण शामिल किए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना पक्ष रखेगा।
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