Jharkhand Sand Mining: नदी में दोबारा जमा बालू से तय होगी खनन की सीमा, साल में दो बार होगी स्टडी

झारखंड में अब बालू खनन की सीमा नदी में दोबारा जमा हुई बालू की मात्रा के आधार पर तय होगी। सिया ने हर साल दो बार रीप्लेनिशमेंट स्टडी अनिवार्य की।


Jharkhand Sand Mining रांची. झारखंड की नदियों में अब बालू खनन की सीमा उपलब्ध बालू की वास्तविक मात्रा के आधार पर तय होगी। स्टेट लेवल एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी यानी सिया ने बालू घाटों के लिए महत्वपूर्ण शर्त लगायी है। इसके तहत खनन के बाद नदी में प्राकृतिक रूप से दोबारा जमा हुई बालू की मात्रा का वैज्ञानिक आकलन किया जायेगा। इसी के आधार पर तय होगा कि संबंधित घाट से कितनी बालू निकाली जा सकती है।

सिया की 133वीं बैठक में चार बालू घाटों की पर्यावरणीय स्वीकृति के हस्तांतरण के दौरान रीप्लेनिशमेंट स्टडी को अनिवार्य किया गया है। अब इन घाटों में हर साल प्री मानसून और पोस्ट मानसून रीप्लेनिशमेंट स्टडी करानी होगी और इसकी रिपोर्ट सिया को सौंपनी होगी।

Jharkhand Sand Mining: प्राकृतिक रूप से जमा बालू के आधार पर होगा खनन

रीप्लेनिशमेंट स्टडी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि खनन के बाद नदी के बालू घाट में प्राकृतिक रूप से कितनी बालू दोबारा जमा हुई। इसके लिए घाट की स्थिति और उपलब्ध बालू का वैज्ञानिक आकलन किया जाता है।

सिया के निर्देश के अनुसार अब केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि किसी घाट से कितनी बालू निकालने की अनुमति है। यह भी देखना होगा कि नदी में वास्तव में कितनी बालू दोबारा जमा हुई है। खनन की सीमा इसी मात्रा के आधार पर तय की जायेगी। इससे अत्यधिक बालू उठाव पर रोक लगाने और नदियों के प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Jharkhand Sand Mining: सोरो घाट में रीप्लेनिशमेंट की 60 प्रतिशत मात्रा तक उत्पादन

सरायकेला खरसावां के सोरो यानी जोरगोडीह बालू घाट में 2025-26 की रीप्लेनिशमेंट स्टडी जमा की जा चुकी है। अब 2026-27 और इसके बाद हर वर्ष अध्ययन कराना होगा। इस घाट में बालू उत्पादन को रीप्लेनिशमेंट की 60 प्रतिशत मात्रा तक सीमित रखने का निर्देश दिया गया है।

रिकॉर्ड के अनुसार सोरो घाट में 2022-23 में 9,93,750 सीएफटी, 2023-24 में 20,49,250 सीएफटी और 2024-25 में 14,33,900 सीएफटी बालू उत्पादन दर्ज हुआ था।

देवबाहनिंदा बागडेगा के 4.32 हेक्टेयर क्षेत्र वाले घाट के लिए भी 2025-26 की रीप्लेनिशमेंट स्टडी जमा है। सिया ने 2026-27 समेत हर वर्ष प्री मानसून और पोस्ट मानसून स्टडी कराने तथा रिपोर्ट सक्षम प्राधिकार को देने का निर्देश दिया है।

Jharkhand Sand Mining: चार घाटों पर मुख्य निर्देश

बालू घाटक्षेत्रफलप्रमुख निर्देश
सोरो यानी जोरगोडीह, सरायकेला खरसावांउपलब्ध विवरण के अनुसाररीप्लेनिशमेंट की 60 प्रतिशत मात्रा तक उत्पादन
देवबाहनिंदा बागडेगा4.32 हेक्टेयरहर वर्ष प्री और पोस्ट मानसून स्टडी
कांके खुर्द, पलामू4.08 हेक्टेयर2026-27 की स्टडी के बाद खनन सीमा तय होगी
नॉर्थ कोयल घाट संख्या चार, गढ़वा4.38 हेक्टेयरहर वर्ष दो बार स्टडी और रिपोर्ट

 


Key Highlights

  1. झारखंड में बालू खनन की सीमा अब नदी में दोबारा जमा बालू की मात्रा से तय होगी।
  2. बालू घाटों में हर वर्ष प्री मानसून और पोस्ट मानसून रीप्लेनिशमेंट स्टडी अनिवार्य।
  3. सोरो घाट में उत्पादन रीप्लेनिशमेंट की 60 प्रतिशत मात्रा तक सीमित रहेगा।
  4. पलामू और गढ़वा के बालू घाट भी नये नियमों के दायरे में आये।
  5. अत्यधिक बालू खनन पर रोक और नदी के प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखना उद्देश्य है।

Jharkhand Sand Mining: पलामू और गढ़वा के घाट भी अध्ययन के दायरे में

पलामू के 4.08 हेक्टेयर क्षेत्र वाले कांके खुर्द बालू घाट में 2024-25 में 5,79,101 सीएफटी और 2025-26 में 3,77,700 घनफुट बालू उत्पादन हुआ। सिया ने स्पष्ट किया है कि 2026-27 की रीप्लेनिशमेंट स्टडी और इसके बाद प्रत्येक वर्ष की स्टडी के आधार पर ही खनन की सीमा तय होगी।

गढ़वा के नॉर्थ कोयल घाट संख्या चार का क्षेत्रफल 4.38 हेक्टेयर है। यहां 2024-25 में 1,44,200 घनफुट और 2025-26 में 2,18,400 घनफुट बालू उत्पादन दर्ज हुआ। इस घाट के लिए भी हर वर्ष प्री मानसून और पोस्ट मानसून रीप्लेनिशमेंट स्टडी कराकर उसकी रिपोर्ट सिया को सौंपने की शर्त लगायी गयी है।

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