झारखंड में आठ साल बाद रांची, बोकारो और जमशेदपुर के छह बड़े बालू घाटों की लीज मंजूर हुई। अब कानूनी खनन शुरू होगा और बालू की कीमत घटने की उम्मीद है।
Sand Mining Update रांची: झारखंड में पिछले आठ वर्षों से जारी बालू संकट अब खत्म होने की उम्मीद बढ़ गयी है। रांची, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम जिलों के छह बड़े बालू घाटों की लीज डीड पर संबंधित उपायुक्तों ने अंतिम मुहर लगा दी है। इसके साथ ही इन जिलों में कानूनी तरीके से बालू खनन का रास्ता साफ हो गया है।
Sand Mining Update:आठ साल से अटका था मामला
बालू घाटों की नीलामी और खनन प्रक्रिया वर्ष 2018 से विभिन्न कारणों से अटकी हुई थी। National Green Tribunal की रोक, पर्यावरण स्वीकृति में देरी और जटिल ई-नीलामी प्रक्रिया के कारण बालू खनन शुरू नहीं हो पा रहा था। इसका फायदा अवैध बालू कारोबार और माफिया उठा रहे थे, जिससे राज्य में बालू की कीमत लगातार बढ़ती जा रही थी।
Key Highlights
झारखंड में आठ साल बाद छह बड़े बालू घाटों की लीज मंजूर
रांची, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम में शुरू होगा कानूनी खनन
30 करोड़ सीएफटी बालू निकाले जाने का अनुमान
सरकार 10 जून से पहले अधिक स्टॉक तैयार करने में जुटी
बालू की कीमत घटने और अवैध कारोबार रुकने की उम्मीद
Sand Mining Update:30 करोड़ सीएफटी बालू निकाले जाने का अनुमान
जानकारी के अनुसार छह बालू घाटों का कुल क्षेत्रफल 120.36 हेक्टेयर है। सामान्य तौर पर एक हेक्टेयर क्षेत्र से करीब पांच लाख सीएफटी बालू निकलता है। इस हिसाब से इन घाटों से लगभग 30 करोड़ सीएफटी बालू निकाले जाने का अनुमान है।
सरकार की योजना है कि 10 जून तक अधिक से अधिक बालू का खनन कर उसका स्टॉक तैयार कर लिया जाये, ताकि मानसून और एनजीटी की संभावित रोक के दौरान भी आपूर्ति प्रभावित न हो।
Sand Mining Update:बालू की कीमत घटने की उम्मीद
अब लीजधारकों को सरकारी रॉयल्टी और जीएसटी जमा कर विधिवत चालान काटकर बालू की बिक्री करनी होगी। इससे सरकार को राजस्व प्राप्त होगा और बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों में कमी आने की संभावना है। लंबे समय से निर्माण कार्यों में बालू की कमी बड़ी समस्या बनी हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी खनन शुरू होने से अवैध कारोबार पर भी अंकुश लगेगा और निर्माण उद्योग को राहत मिलेगी।
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