झारखंड हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति से जुड़ी 84 अभ्यर्थियों की याचिका पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 16 सप्ताह का समय दिया है।
Jharkhand Teacher Recruitment रांची: झारखंड में प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में 84 अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 16 सप्ताह का समय दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति प्रक्रिया में अपनी दावेदारी को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि वे निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करते हैं और उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया का लाभ मिलना चाहिए।
Jharkhand Teacher Recruitment: 84 अभ्यर्थियों ने दायर की है याचिका
याचिका में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता और पात्रता रखते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के दिशा-निर्देशों और पात्रता मानकों का हवाला देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग की है।
अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि पात्र होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति का लाभ नहीं मिल सका, जिसके बाद न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी।
Key Highlights
प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई।
84 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर दायर की है याचिका।
कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 16 सप्ताह का समय दिया।
अभ्यर्थियों ने एनसीटीई की पात्रता संबंधी शर्तों का हवाला दिया।
मामले की अगली सुनवाई सरकार के जवाब के बाद होगी।
Jharkhand Teacher Recruitment: सरकार को 16 सप्ताह में देना होगा जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सरकार को इसके लिए 16 सप्ताह का समय दिया है। सरकार के जवाब के बाद ही मामले की अगली सुनवाई की जाएगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
अदालत के इस निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और अभ्यर्थियों की मांगों पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना होगा।
Jharkhand Teacher Recruitment: शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर
झारखंड में लंबे समय से शिक्षक नियुक्ति से जुड़े विभिन्न मामलों पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा चल रही है। ऐसे में इस मामले का फैसला भी हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के जवाब और आगामी सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि याचिकाकर्ताओं की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और नियुक्ति प्रक्रिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
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