मधुबनी के सुखेत पंचायत ने गोबर और जैविक कचरे से वर्मी कंपोस्ट बनाकर स्वच्छता, रोजगार और आय का नया मॉडल विकसित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की सराहना।
Waste Management Success पटना: बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड स्थित सुखेत ग्राम पंचायत ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अनोखा मॉडल पेश कर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। गोबर और जैविक कचरे के वैज्ञानिक उपयोग से तैयार किया गया यह सुखेत मॉडल आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत विकास की मिसाल बन चुका है। इसकी सफलता की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में कर चुके हैं।
इस अभिनव पहल की शुरुआत मछडी गांव के प्रगतिशील किसान सुनील कुमार ने की, जिन्होंने गांव की सबसे बड़ी समस्या को आजीविका और स्वच्छता के अवसर में बदल दिया।
Waste Management Success:गोबर और कचरे से तैयार हो रही उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कंपोस्ट
पशुपालन आधारित सुखेत पंचायत में पहले गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर गोबर और कचरा बिखरा रहता था, जिससे गंदगी, दुर्गंध और बीमारियों का खतरा बना रहता था। इस समस्या के समाधान के लिए किसान सुनील कुमार ने करीब 50 से 60 परिवारों को इस अभियान से जोड़ा।
प्रतिदिन दो बार ठेलों के माध्यम से घरों से 20 से 30 किलोग्राम गोबर और रसोई का जैविक कचरा एकत्र किया जाता है। इसके बाद पंचायत में बनाए गए 70 फीट लंबे और 20 फीट चौड़े दो विशाल शेड में स्थापित वर्मी कंपोस्ट यूनिट में इसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाता है।
हर महीने लगभग 100 क्विंटल गोबर और जैविक कचरे के प्रसंस्करण से 35 से 40 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाली केंचुआ खाद तैयार होती है। इस परियोजना को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा का तकनीकी सहयोग मिला है। विश्वविद्यालय ने पहले इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कराया था और अब वही इस जैविक खाद का प्रमुख खरीदार भी है।
Key Highlights:
मधुबनी के सुखेत पंचायत का वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल पूरे देश के लिए बना प्रेरणा।
गोबर और जैविक कचरे से हर महीने 35 से 40 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार।
1200 किलो गोबर देने पर ग्रामीणों को मिलता है मुफ्त LPG सिलेंडर रिफिल कूपन।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में इस मॉडल की सराहना की।
पहल से छह स्थानीय युवाओं को रोजगार और किसान को सालाना तीन लाख रुपये तक की आय।
Waste Management Success:गोबर के बदले मुफ्त LPG सिलेंडर, ग्रामीणों को मिल रही बड़ी राहत
सुखेत मॉडल की सबसे अनोखी विशेषता इसका एलपीजी कूपन सिस्टम है। इस योजना के तहत जो परिवार 1200 किलोग्राम गोबर संयंत्र को उपलब्ध कराता है, उसे एक एलपीजी गैस सिलेंडर रिफिल का कूपन दिया जाता है।
यदि कोई परिवार प्रतिदिन औसतन 20 किलोग्राम गोबर देता है, तो उसे लगभग हर दो महीने में एक एलपीजी सिलेंडर मुफ्त रिफिल कराने का लाभ मिलता है। इससे ग्रामीण परिवारों का रसोई गैस पर होने वाला खर्च कम हुआ है और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को भी बढ़ावा मिला है।
Waste Management Success:रोजगार और आय बढ़ाने में भी सफल रहा सुखेत मॉडल
किसान सुनील कुमार के अनुसार इस पहल से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रुपये की आय हो रही है। वहीं इस परियोजना के जरिए छह स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार भी मिला है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण रोजगार को एक साथ बढ़ावा देने वाला यह मॉडल अब अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।
Highlights



















