Jharkhand Maoist Surrender: झारखंड में माओवादियों को बड़ा झटका, 3 इनामी नक्सलियों ने डाले हथियार; पति-पत्नी भी शामिल

Jharkhand Maoist Surrender: झारखंड में माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच संगठन को बड़ा झटका लगने की जानकारी सामने आई है। झारखंड में लंबे समय तक सक्रिय रहे तीन इनामी माओवादियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। तीनों ने पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने भी तीनों इनामी नक्सलियों के आत्मसमर्पण की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में पूर्वी सिंहभूम के पटमदा निवासी इनामी माओवादी रीजनल कमेटी सदस्य राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी और इनामी जोनल कमेटी सदस्य मीता उर्फ नयनतारा तथा महिला कैडर बुलू उर्फ गौरी शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, तीनों के खिलाफ झारखंड में कुल 81 मामले दर्ज हैं।

तीनों के खिलाफ दर्ज हैं 81 मामले

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राम प्रसाद मार्डी के खिलाफ 44 मामले दर्ज हैं। वहीं मीता उर्फ नयनतारा के खिलाफ 19 और गौरी उर्फ बुलू के खिलाफ 18 मामले दर्ज बताए गए हैं। इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमला, आईईडी विस्फोट, हथियार एवं विस्फोटक अधिनियम और प्रतिबंधित संगठन से जुड़े आरोप शामिल होने की जानकारी दी गई है। पुलिस के अनुसार, राम प्रसाद माओवादी संगठन में रीजनल कमेटी सदस्य के तौर पर सक्रिय था, जबकि मीता जोनल कमेटी की सदस्य के रूप में काम कर रही थी। गौरी को संगठन की सब-जोनल कमेटी से जुड़ा बताया गया है।

AK-47 के साथ राम प्रसाद ने किया सरेंडर

आत्मसमर्पण करने वालों में राम प्रसाद मार्डी को संगठन का महत्वपूर्ण सदस्य बताया गया है। उसके बारे में पुलिस रिकॉर्ड में कहा गया है कि वह लंबे समय से झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय था। राम प्रसाद ने आत्मसमर्पण के दौरान अपनी AK-47 राइफल भी पुलिस के सामने जमा की। वह मूल रूप से पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा का रहने वाला बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ दर्ज मामलों में कई गंभीर आपराधिक और नक्सली घटनाओं का उल्लेख है। इनमें मुठभेड़, पुलिस बल पर हमला और आईईडी विस्फोट से जुड़े मामले शामिल हैं।

पति-पत्नी ने एक साथ छोड़ा संगठन

राम प्रसाद की पत्नी मीता उर्फ नयनतारा भी माओवादी संगठन में सक्रिय सदस्य बताई गई है। वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम थाना क्षेत्र के सोनाचूड़ा की रहने वाली बताई गई है। पुलिस के अनुसार, मीता पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। झारखंड पुलिस के अनुसार, पति-पत्नी के एक साथ हथियार छोड़ने की यह राज्य के पुलिस इतिहास में चौथी घटना है। मीता के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में कुल 19 मामले दर्ज होने की जानकारी है। इनमें सुरक्षा बलों पर हमला, आईईडी विस्फोट और हत्या के प्रयास से जुड़े आरोप शामिल हैं।

गौरी पर भी दर्ज हैं 18 मामले

तीसरी आत्मसमर्पण करने वाली माओवादी बुलू उर्फ गौरी है। वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबनी थाना क्षेत्र के करमसोल की रहने वाली बताई गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह माओवादी संगठन की सक्रिय कैडर थी और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। गौरी के खिलाफ कुल 18 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ मुठभेड़, आईईडी विस्फोट, हत्या, हत्या के प्रयास, हथियार एवं विस्फोटक अधिनियम और यूएपीए से संबंधित धाराओं का उल्लेख है।

मुठभेड़ और IED घटनाओं का भी रिकॉर्ड

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, राम प्रसाद से जुड़े मामलों में मार्च 2026 की एक मुठभेड़ का भी उल्लेख है। मनोहरपुर, छोटानागरा और जराईकेला थाना क्षेत्रों की सीमा पर हुई इस मुठभेड़ में कोबरा बटालियन का एक जवान घायल हुआ था। मौके से कारतूस, मैगजीन और वायरलेस सेट बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में दी गई है। इसके बाद आईईडी विस्फोट की घटना में कोबरा 209 बटालियन के सहायक समादेष्टा अजय मल्लिक और एक हवलदार के घायल होने की बात भी रिकॉर्ड में है। वहीं, जनवरी 2023 में टोंटो थाना क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान आईईडी विस्फोट में कोबरा 209 के छह जवानों के घायल होने तथा अगले दिन दूसरे विस्फोट में तीन जवानों के घायल होने का उल्लेख किया गया है।

जंगलों में बढ़ते अभियान के बीच सरेंडर

झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा से जुड़े जंगलों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। दलमा, सारंडा और पूर्वी सिंहभूम के विभिन्न इलाकों में सर्च ऑपरेशन के साथ माओवादी नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की कार्रवाई की जा रही है। एमजीएम, पटमदा, बोड़ाम और घाटशिला क्षेत्र के जंगलों में भी सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ी हैं। अभियान में पुलिस के साथ कोबरा बटालियन के जवान भी शामिल हैं। पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में सक्रिय माओवादियों की तस्वीर और पहचान से जुड़े पोस्टर भी लगाए हैं। इन पोस्टरों के जरिए ग्रामीणों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने की अपील की गई थी। इसी बीच तीन इनामी माओवादियों का पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज मामलों में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही तय होगी।

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